स्वीडन के रीम जोयस के बारे में मशहूर है कि वह पलकें झपका कर हवा का ऐसा झोंका पैदा करते थे कि सामने दो फीट दूर जल रही मोमबत्ती बुझ जाती थी। 1998 में उन्होंने यह करिश्मा किया तो लोगों को यकीन नहीं आया।
चौदह साल की उम्र में उन्हें अहसास हुआ कि वे पलकें झपकाते हैं तो आसपास तीली रगड़ रहे लोगों की माचिस से चिंगारियां भी नहीं निकलती।
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गोटेबोर्ग में हुई स्पिरिचुअल कांफ्रेंस में इस बात की पुष्टि हुई। उसमें क्रिश्चियन्स साइंस रिव्यू के ए. डी. स्टीवर्ट ने कहा कि किसी अंग से दूसरे अंगों का भी काम लिया जा सकता है।
अपने भीतर संकल्प होना चाहिए। यह बल प्रभुकृपा और प्रार्थना के बल पर विकसित किया जा सकता है। कुछ लोगों को इसकी झलक अनायास कुछ किए मिल जाती है।
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गैलीलो झील में उठे तूफान और नाव के भयभीत सवारों के बीच अविचलित ईसा मसीह ने बस इतना कहा, शांत हो जा मूर्ख! यह कहते ही तूफान शांत हो गया।
यात्रियों ने चैन की सांस ली। लोगों ने राहत की सांस ली तो जीसस ने यात्रियों से कहा दोस्तों, विश्वास बड़ा है, तूफान नहीं। दिल से डर निकालकर हिम्मत को स्थान देना चाहिए। तभी हर कार्य में सफलता मिलती है।