मरने के बाद चिता पर रखते ही या उसमें आग लगाते ही लोगों के उठ खडे़ होने अथवा दफना दिए जाने के बाद कब्र के भीतर से जीवित लौट आने की कितनी ही खबरें आती है।
इसका कारण यह भी बताया जाता है कि ठीक से मृत्यु होने के पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह की घटनाओं से परे भी कई ऐसे वाकये हुए हैं जिनमें मरने के घंटे दो घंटे बाद लोग फिर जी उठे।
चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित कर दिए जाने के बाद फिर से जी उठने की खबरों में यह भी आता है कि लोग अपने अनुभव सुनाने लगते हैं।
इन जानकारियों और जांच प्रयोगों से हट कर न्यूयार्क की स्टेट यूनर्सिटी में प्रोफेसर औ साउथंपन विश्वविद्यालय में रिसर्च फैलो रहे डा. सेम पेरनिया का कहना है कि मृत्यु के बाद जीवन का अंत नहीं हो जाता।
मृत्यु के बाद तीन मिनट तक होता है यह एहसास
मरने के बाद भी कुछ समय तक, कम से कम तीन मिनट तक व्यक्ति को अपने शरीर में होने का आभास होता है। यही नहीं वह प्रतिक्रिया भी करता है।
मृत्यु के बाद फिर जी उठे लोगों ने जो अनुभव सुनाए, उनसे पुष्टि हुई की मृत्यु के बाद शरीर भले ही नष्ट हो जाए, चेतना का वह अंश ज्यों का त्यों बरकरार रहता है, जो शरीर को चैतन्य रखता है।
या जिसके कारण शरीर में बोध रहता है। डा.सैम के निर्देशन में हुए इस अध्ययन में ब्रिटेन, अमेरिका और आस्ट्रिया के 15 अस्पतालों में 2060 मामलों का अध्ययन किया गया।
इस अध्ययन के रोचक निष्कर्ष सामने आए। कुछ मामलों में लोगों ने अशरीरी अनुभव बताए। कहा कि वे अपने संबंधियों को दुखी होने से रोक रहे थे।
कहने की कोशिश कर रहे थे कि उनकी मृत्यु नहीं हुई है, वे जीवित है और किसी मित्र से या जीवनसाथी से या निकट संबंधी से बात करना चाहते हैं।
मरने के बाद भी जीवन बचा रहता है
मर रहे लोगों के अनुभवों या मृत्यु की प्रक्रिया के दौरान प्रयोगशाला में चल रहे प्रयोगों से पता चला कि 39 प्रतिशत मामलों में लोग हार्ट अटैक के कारण मृत हुए थे।
चिकित्सा उपचार के दौरान उनके होश हवाश कायम थे। मृत्यु से तीन मिनट पहले तक उन्हें अपने और आसपास जो घट रहा है, उस बारे में अच्छी तरह याद था।
मृत्यु के बाद फिर से जन्म होता है या नहीं, इस मुद्दे पर विभिन्न धर्म परंपराओं मे मतभेद है। पर मरने के बाद भी जीवन बचा रहता है, एक नया संसार शुरु होता है, इस विषय में कोई दो राय नहीं है।