फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसिक एकाग्रता के बल पर दूर बैठे लोगों के दिलों की बात को जाना जा सकता है

Wed, 27 Dec 2017 02:29 PM IST
पूनम नेगी
विज्ञापन
विज्ञापन
टेड सेरियोस जब अपने सामने कैमरा रखकर मन को जिस भी वस्तु पर केंद्रित करते थे, तो कैमरे के लैंस के सामने टेड की आकृति के स्थान पर उनका कल्पना चित्र उभर आता था। मिसाल के तौर पर, टेड ने यदि किसी घोड़े पर अपना ध्यान लगाया, तो कैमरे के लैंस में टेड की जगह घोड़े का चित्र उभरा आता था, जबकि कैमरे के सामने टेड सेरियोस बैठा था। भारतीय मनीषियों के मुताबिक, टेड के साथ हुई यह घटना न तो हिप्नोटिज्म है, न ही फोटोग्राफी की कोई ट्रिक है। वरन ऐसा होना साधक की ध्यान की गहन स्थिति में एकाग्र होने का फल है। इसी के बल पर मनीषी एक ही स्थान पर बैठे-बैठे न केवल मीलों दूर रहने वाले लोगों के मन की बात जान लेते थे, साथ ही दूर-दर्शन-श्रवण से उन्हें स्वास्थ्य लाभ भी देते थे।
विज्ञापन


पढ़ें- इन तरीकों से जानें भविष्य में क्या होने वाला है आपके साथ

1963 में अनेक वैज्ञानिकों, फोटोग्राफरों, बुद्धिजीवियों तथा इलिनाइस सोसायटी फॉर साइकिक रिसर्च (यह संस्थान अमेरिका में मनोविज्ञान तथा अति मानवीय चेतना संबंधी शोध करती है) की उपाध्यक्ष पालिन ओहलर की उपस्थिति में टेड सेरियोस ने कई प्रतिबिंबों, फिल्मों पर नियंत्रण के कैमरों के प्रयोगों द्वारा भी कल्पना चित्र खींच दिखाए, तो तहलका मच गया। वैज्ञानिकों को भारी आश्चर्य हुआ कि इस तरह दूरवर्ती वस्तुओं के फोटो लेना केवल माइक्रो-फिल्म द्वारा ही संभव होता है।  
विज्ञापन

1962 में ही टेड सेरियोस को भारतवर्ष का नक्शा देखने को मिला। आमतौर पर किसी नक्शे से सिर्फ भौगोलिक सीमाओं का अनुमान, तो किया जा सकता है। मगर किस स्थान पर क्या हो रहा है, कौन सी इमारत खड़ी है, कितने वृक्ष, तालाब आदि हैं, इन सबकी कोई स्पष्ट जानकारी मानचित्र से नहीं होती। उस समय टेड सेरियोस से भारत के भी कुछ प्रसिद्ध स्थानों के कल्पना चित्र उतारने को कहा गया। टेड सेरियोस ने फतेहपुर सीकरी की मस्जिद के मुख्य द्वार और दिल्ली के लाल किले के दीवाने-ए-आम के दो मानसिक चित्र खींचे। बाद में पता चला कि वह कल्पना-चित्र फतेहपुर सीकरी की मस्जिद के मुख्य द्वार और लाल किले के दीवाने आम की बिलकुल हम-शक्ल थे। भारतीय योग तत्ववेत्ताओं की दृष्टि में यह कोई चमत्कार नहीं अपितु मानसिक एकाग्रता की उच्चतम अवस्था है।

अमर उजाला के कल्पवृक्ष पन्ने से साभार
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें