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मरकर जिंदा होने वाले लोगों में यह तीन बदलाव आ जाते हैं

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डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। चिकित्सकीय तौर पर मर चुके इन व्यक्तियों के अंतिम संस्कार की तैयारी की ही जा रही थी कि यकायक उनमें जीवन के लक्षण दिखाई दिए और वे उठ बैठे। कुछ व्यक्ति ऐसे थे जिनकी मृत्यु डाक्टरों ने तय मान ली थी। उन्हें अब ठीक नहीं किया जा सकता था।
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पर उन लोगों में भी यकायक स्वस्थ होने के लक्षण दिखाई दिए। दोनों तरह के इन लोगों ने आसन्न मृत्यु के समय के जो अनुभव बताए उन्हें लेखक ने ‘रिटर्न फ्रॉम डेथ’ में संकलित किया है। मौत को छूकर लौट आए लोगों के जीवन में मूलतः तीन तरह के बदलाव दिखाई दिए।

उस महिला ने बताया अपना अनुभव

मार्ग्रेट ग्रे ने मौत को छूकर लौटे करीब नब्बे लोगों से बात की। इन्होंने पाया कि इनके मिजाज, सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ जाते। जिंदगी वही नहीं रह जाती जो इस अनुभव से पहले थी। एक बदलाव यह है कि दूसरों के प्रति आत्मीयता एवं प्रेम बढ़ जाता है। दूसरा जीवन के रहस्य और ब्रह्मांडीय सिद्धान्तों को जानने की ललक

तीसरा दूसरों को अनायास ही स्वस्थ कर देने वाली नैसर्गिक शक्तियों और अनुदानों के विकास की इच्छा। मृत्यु अनुभव से गुजरी एक हृदय रोग पीड़ित महिला का कहना है कि इस अनुभव के बाद उसने अपने अंदर प्रेम के भाव को धीरे-धीरे विकसित होते पाया।

उसका कहना है कि छोटी-छोटी एवं नगण्य चीजों से भी अब उसे आनन्द आने लगा। दूसरों के विषय में लगभग अतीन्द्रिय स्तर पर जागरुकता पैदा हुई। बीमार और मृत्यु का सामना कर रहे लोगों के प्रति उदात्त संवेदना पैदा हुई। उन्हें वह किसी भी तरह यह बताना चाहती थी कि मृत्यु की प्रक्रिया जीवन के विस्तार से अधिक और कुछ नहीं है।

गर्भवती महिला जब मौत के मुंह से लौटकर आई

मृत्यु के अनुभव से गुजरे लोगों में जीवन, मृत्यु व सृष्टि के सत्य को जानने के तीव्र भाव जाग्रत् होते देखा गया। ऐसी ही एक महिला का वक्तव्य है कि अब उसे अपने बारे में जानने की इच्छा तीव्र हो उठी कि वह कौन है? यह जानकर दूसरों को भी बताना चाहती है। प्रसूति के समय मृत्यु के करीब पहुंची उस महिला का कहना था कि अब वह जीवन मरण के रहस्य की खोज में जुटी है।

मृत्यु के अनुभव ने व्यक्तियों के दृष्टिकोण में अद्भुत परिवर्तन लाए हैं। जीवन के स्वरूप व उद्देश्य की नई समझ दी। जीवन के प्रति अधिक विधेयात्मक रुख का विकास किया। एक नवीन जीवन का बोध हुआ। अधिक आत्मबल के साथ आत्मगौरव का नवीन भाव जाग्रत् हुआ। भौतिक सम्पदाओं से लगाव कम हो गया। दूसरों से आशा-अपेक्षाएं कम हो गई।

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अब इन्हें मरने से डर नहीं लगता

ट्रक से कुचले गए और मृत्युशैया से वापस लौट आए जानसन ब्रूनेइ का कहना था कि इस अनुभव के बाद मुझे मृत्यु का कोई भय नहीं रहा। जीवन को खतरे में डालने से यथासंबंध बचूंगा पर यह तय है कि एक न दिन मौत आएगी ही। उस वक्त मृत्यु का स्वागत करूंगा, क्योंकि जैसा मैंने इसका अनुभव किया है यह सबसे आश्चर्यजनक चीज है।

‘इंटरनेशनल ऐसोसिएशन फॉर नीयर डेथ स्टडीज’ के संस्थापक प्रो. कैनेथ रिंग ने हार्ट अटैक के बाद मृत्यु का भय समाप्त हो गया था। डॉक्टर हैरान थे कि उसे किसी भी समय अपने मरने का विश्वास था, लेकिन उसे कोई भय नहीं था। वह जानती थी कि मृत्यु क्या है?
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