साधना या सामान्य स्थिति में होने वाले आध्यात्मिक अनुभवों का जिक्र औरों से करना नैतिक दृष्टि से तो गलत है ही, उससे ज्यादा आध्यात्मिक लिहाज से भी नुकसान देह है। योग और भक्तिमार्ग का अध्ययन और प्रयोग कर रही जर्मन साधिका वंदना प्रभुदासी (मूलनाम एडलिना अल्फ्रेड) का कहना है कि साधना के लिहाज से नैतिकता का मूल्य बहुत ज्यादा नहीं है।
महत्वपूर्ण यह है कि आप साधना के मार्ग पर कैसे चल रह हैं। इसीलिए किसी अनुभवी गुरु या साधक के संगी साथी का परामर्श उपयोगी साबित होता है।
साथ साधना कर रहे व्यक्तियों के अनुभवों का जिक्र करते हुए एडलिना ने शुरुआती दस अनुभव ऐसे बताए हैं जो अध्यात्म मार्ग पर बढ़ने के सूचक भी हो सकते हैं और किसी विकार के लक्षण भी। इन अनुभवों में ध्यान के समय भौहों के बीच पहले काला और फिर नीला रंग दिखाई देना एक सामान्य अनुभव है।
शरीर के निचले हिस्से पर जहां रीढ की हड्डी शुरु होती है, स्पंदन का अनुभव, सिर में शिखास्थान पर चींटियां चलने जैसा लगना, कपाल ऊपर की तरफ खिंचने जैसा लगना आदि भी इसी तरह के अनुभव है।