आप देखेंगे उस टुकड़े में जो पृथ्वी का सबसे लघुतम टुकड़ा होगा, कैसी हलचल मची हुई है। आप उस छोटाई का अनुमान नहीं कर सकते हों तो एक सेंटीमीटर में उन परमाणुओं को बिछाकर देख लें, इतनी सी जगह में एक करोड़ परमाणु आराम से बैठे मिलेंगे।
इतना छोटा कि जिसकी कल्पना भी न की जा सके। अब इसका नाभिक (न्यूक्लियस) देखते हैं तो लगता है, यह तो और भी छोटा है। एक सेंटीमीटर स्थान में एक हजार करोड़ नाभिक मजे में आ सकते हैं। इस छोटी से छोटी स्थिति में कितनी हलचल है, उसे देख पाएं तो पता चलेगा कि कण कण में प्रकाश की गति से (करीब तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चीजें दौड़ रही हैं।
एक और उदाहरण से देखें। चेतना जितनी सूक्ष्म है, उतनी ही विराट भी। पानी का एक परमाणु एक सेकेंड में 30 खरब टक्करें लेता है, उसकी एक परिक्रमा की दूरी सेंटीमीटर के ढाई करोड़वें भाग जितनी होती है पर इतनी सशक्त कि यदि उसे छेड़ दिया जाए तो इसी परमाणु की चेतना संपूर्ण पृथ्वी को जलाकर खाक कर सकती है। बमों की रचना में इसी शक्ति वाले भाग को छेड़ा जाता है।