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सिर्फ सोचो और बीमारियां ठीक हो जाएंगी

Mon, 08 Jul 2013 01:51 PM IST
ज्योतिर्मय
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जितनी बीमारियां मनुष्य को सताती हैं, उनका अस्सी प्रतिशत हिस्सा तो कहीं मौजूद होता ही नहीं है। वे दरअसल मन में उपजती हैं और किसी तरह वहां से हटाई जा सके तो बिना कुछ किए ठीक भी हो सकती हैं। चिकित्सा विज्ञान भी इस तथ्य को मानने लगा है।
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डा. हंफ्री डेविड ने करीब आठ साल पहले इस तरह की बीमारियों के लिए पेप्सीबू शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि ध्यान के जरिए अपनी विचार सारणी को सही आयाम देने के बाद खुद ही इस तरह की बीमारियों से निजात पाया जा सकता है, या कुशल चिकित्सक की मदद से रोगमुक्त हुआ जा सकता है।

उनके अनुसार इस श्रेणी की बीमारियां अन्य रोगों से अलग नहीं होती। उनके लक्षण असल बीमारियों जैसे ही दिखाई देते हैं। डाक्टर सिर्फ लक्षणों को देखकर तय करता है कि इलाज के लिए असली दवाई दी जाए या फर्जी दवाओं से ही काम चल जाएगा।
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इस तरह के एक उपचार का हवाला देते हुए उन्होंने अपनी पत्नी एमिला के साथ हुए एक वाकये का जिक्र किया। हुआ यह कि, एमिला एक उत्सव में अपने पति के साथ शामिल हुई और वहां अचानक माइग्रेन का दौरा पड़ा। डा. हंफ्री को अपनी पत्नी की इस तकलीफ के बारे में पता था। उन्होंने जेब मे रखा कमीज का एक टूटा बटन निकाला और एमिला से कहा कि कल शाम ही एक नई दवा आई है। उसका सेंपल मेरी जेब में ही रखा रह गया।

इस दवा को जीभ के नीचे रख कर चूसती रहो। माइग्रेन का दर्द ठीक हो जाएगा। एमिला ने ऐसा ही किया। पूरे उत्सव में वह बटन को दवा समझ कर चूसती रही और तकलीफ दूर हो गई। उत्सव पूरा होने के बाद डा. हंफ्री ने वह दवा नामक बटन वापस ले लिया। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है कि क्वेकर संप्रदाय के लोगों का यह मानना सही है कि तुम सोचो कि रोग दूर हो गया और रोग मिट जाएगा।
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