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दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के तीन टिप्स

Fri, 05 Apr 2013 11:24 AM IST
ज्योतिर्मय
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वैसे तो कर्मों के फल को कोई नहीं रोक सकता, वह हर हाल में भोगना ही पड़ता है। लेकिन उपाय ऐसे अवश्य हैं, जिनके बल पर अनहोनी या असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
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उसे बदलने की तकनीक पर काम करते हुए चेन्नई के वैदिक इस्टीट्यूट ऑफ स्पिरिचुअलिज्म ने कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जिनके जरिए अपने भाग्य भविष्य को काफी हद तक बदला जा सकता है। उन उपायों के बारे में बताते हुए इंस्टीट्यूट के प्रो. सोमदेव शर्मा ने कुछ टिप्स लिखे हैं। उन बिंदुओं में तीन उपाय इस प्रकार हैं।

पहली टिप: अभी तक आपका जो भी रुटीन रहा हो उसे भूल जाइए लेकिन कल से ही सूर्योदय से पहले हर हाल में बिस्तर छोड़ कर उठ जाएं। नित्य कर्मों से निपट कर साफ और धुले हुए वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की और मुंह करके बैठें। सुबह उगते हुए सूरज के सिंदूरी रंग को देखें। 15 से 20 मिनट तक सुबह की अरुणिम आभा का ध्यान करें और सुख-समृद्धि के साथ मन में प्रसन्नता का एहसास करें।
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दूसरी टिपः इसमें कुंडलिनी शक्ति के जागरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। अध्यात्मविदों के अनुसार कुंडलिनी शक्ति शरीर में मेरूदंड में स्थित है। इसे जगाकर साधक का दुर्भाग्य मिटाया जा सकता है।

शुरुआती तौर पर इसका अभ्यास कमर सीधी करके बैठने के रूप में किया जाता है। जिन्हें अपने भाग्य और भविष्य को बदलना है उन्हें तुरंत इसकी शुरुआत अवश्य कर देनी चाहिये। जब भी जहां भी बैठें अपनी रीढ़ को यानी मेरुदंड को हर हाल में सीधा रखे। कमर झुकाकर बैठने से कुंडलिनी शक्ति कुंद होने लगती है, जिससे इंसान दुर्भाग्य से जल्दी प्रभावित हो जता है।

कामयाबी की तीसरी टिपः इष्टमंत्र की शक्ति के महत्व से सभी परिचित हैं। यह कामयाबी का तीसरा गुर हैं। इष्टमंत्र अर्थात इष्टदेवता की आराधना के लिए जपा जाने वाला मंत्र।

अध्यात्मविदों की मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के समय निश्चित समय, निश्वित स्थान पर विशुद्ध आसन पर बैठकर बीस मिनट भी जप करता है उसके सारे बुरे प्रारब्ध यानी कर्मफलों का नाश हाने लगता है। पहले दिन से ही उसका सौभाग्य उदय होने लगता है।
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