गुरु अर्जुनदेव जी की बहुत ही प्यारी पंक्ति है ‘गोविन्द के गुण गाओ साधे’। इसमें सुमिरन की महिमा का गुणगान किया है कि ‘हे साधु! मनुष्य को यह जीवन सुमिरन करने के लिए ही हुआ है। लेकिन चिंताग्रस्त मन सुमिरन भी कैसे करें? मन को चिंता मुक्त करने की एक अनोखी विधि है ‘योगनिद्रा’।
योगाभ्यास प्रायः जागृत अवस्था में ही किया जाता है, परंतु योगाभ्यास की यह विशेष विधि लेट कर की जाती है। पूरी तरह जागृत होते हुए भी शरीर और मन पर गहरी नींद के तमाम लक्षण अनुभव कर पाते हैं।
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योगनिद्रा शरीर को गहन विश्राम देकर पूरी तरह शिथिल करती है। लेकिन सोने के बाद भी सुबह उठकर अगर आप थका महसूस करते हैं, तो आपके रात भर नींद में होने का कोई अर्थ नहीं है।
ये सारे लक्षण आपके तनाव में होने के लक्षण हैं। बहुत से लोगों को साइनस की समस्या रहती है। श्वास ठीक से नहीं ले पाते, ज़ुकाम बना रहता है। अगर मन तनाव में रहता है, तो शरीर कैसे स्वस्थ रह सकता है?
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अस्सी प्रतिशत रोगों का मूल तो आपको अपने मन के तनावों में ही मिल जाएगा। रोग कभी शरीर से मन की तरफ नहीं जाते। परंतु मन के रोगी होने से शरीर भी रोगी होता है।
योगनिद्रा हमको सम्पूर्ण विश्राम में ले जाकर सुंदर स्वास्थ्य प्रदान करती है। शरीर के स्तर पर तो योगनिद्रा हमारी मांसपेशियों और नाड़ियों को विश्राम देती ही है, साथ ही हमें मानसिक और भावनात्मक विश्राम भी प्रदान करती है।