अगर आप बिल्कुल ठीक हैं और रोजाना तीन से चार घंटे रोज सोते हैं तो यह ठीक है। कुछ मायनों में यह एक उत्तम स्थिति है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी मानसिक परिस्थितियों के कारण ठीक से सो नहीं पाते। अपनी कोशिकीय वजहों अथवा जेनेटिक यानी वंशानुगत तकलीफों के कारण नहीं सो पाते। मगर ऐसे लोग बहुत थोड़े है। योग साधन करते समय नींद आश्चर्यजनक ढंग से कम हो जाती है। उस साधन के समय शीर्ष ग्रंथि से जो स्राव होता है, उसे आमतौर पर अमृत या सुधा कहते हैं। अगर यह स्राव बढ़ जाए और अमृत बहने लगे तो सबसे पहले नींद कम होती है। योग का एक आयाम भी होता है कि नींद को कैसे घटाया जाए, क्योंकि नींद का मायने जिंदगी से पलायन भी है।
तब सोने की जरुरत ही क्या है
सोना
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कोई भी व्यक्ति नींद का आनंद नहीं ले सकता। आप उस आराम का आनंद लेते हैं, जो नींद आपको देती। किसी भी वजह से अगर आप किसी दिन सोते हैं या नहीं सोते हैं अथवा पर्याप्त नहीं सो पाते हैं, तो आप अगले दिन सुबह उठ कर देख सकते हैं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं।
अगर आप सुबह उठकर ठीक और स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, दिनभर सक्रिय रहते हैं तो नींद के बारे में भूल जाइए। अगर आप बिना नींद के भी काम कर रहे हैं और आप तरोताजा और सक्रिय हैं तो फिर कोई दिक्कत नहीं है? हालांकि यह स्थिति कम ही आती है, लेकिन आ जाती है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है।