मनोज ने आदित्य से पूछा, क्या तुम कंप्यूटर चलाना जानते हो? आदित्य बोला, सर जानता तो नहीं, लेकिन सीख लूंगा। मनोज ने फिर पूछा, क्या तुम्हारा ईमेल आईडी है? आदित्य बोला, जी नहीं सर। लेकिन कंप्यूटर सीख कर मैं ईमेल आईडी भी बना लूंगा। मनोज को अपनी टीम के लिए एक भरोसेमंद कर्मचारी चाहिए था। लेकिन आदित्य का न तो कोई परिचित था, जो उसकी सिफारिश कर सके। मनोज ने आदित्य को दो दिन के बाद आने को कहा। दिक्कत यह थी कि मनोज को जल्द से जल्द कोई नया कर्मचारी चाहिए था।
उस दिन वह बड़ा परेशान होकर घर वापस लौटा। मनोज के पिता जी ने जब मनोज को देखा, तो उन्होंने पूछा, क्या बात है। मनोज ने सारी कहानी अपने पिताजी को बताई। पिताजी कहानी सुनने के बाद कहीं उठ कर चले गए। जब वह वापस लौटे, तो उनके हाथ में दो कमीज, कुछ बटन और सुई धागा था। थोड़ी कड़क आवाज में पिता जी बोले, मनोज, मेरी कमीज के बटन सिल दो, मुझे आधे घंटे में कहीं जाना है। वह बोला, लेकिन पिताजी मुझे सिलना नहीं आता। आप कोई दूसरी कमीज पहन लीजिए। पिता जी गुस्साते हुए बोले, तुम इतनी बड़ी कंपनी के मालिक बन गए हो, दो बटन नहीं सिल सकते। शर्म आनी चाहिए तुम्हें। मनोज गुस्से में कमीज, सुई धागा और बटन लेकर अपने कमरे में चला गया। उसने मन ही मन सोचा, आज मैं कमीज में बटन लगाकर ही रहूंगा।
कुछ देर बाद मनोज कमरे से बाहर आया और पिता जी को कमीज पकड़ाते हुए बोला, लीजिए आपकी कमीज। पिता जी बोले, अरे, तुम तो कह रहे थे तुम्हंे सिलना नहीं आता, पर तुम तो उस्ताद निकले। जो बात तुम्हारे साथ लागू होती है, वह बात औरों के साथ भी तो लागू हो सकती है न। क्या आदित्य के अंदर वह बात नहीं। मनोज एक पल में पिता जी की बात समझ गया और उनसे गले लग गया। अगले दिन से आदित्य मनोज के साथ काम करने लगा।
सफलता का पहला नियम है- अपने सफल हो पाने पर विश्वास करना।