योग फैशन में भले हो पर एरोबिक्स के मुकाबले वह पीछे ही है। शरीर के गठन में एरोबिक्स का असर तुरंत, कम से कम योगाभ्यास से तो पहले ही दिखाई देता है लेकिन उसमें मेहनत और कसरत के साथ शरीर पर तेज दबाव पड़ता है। ऋषिकेश के योग वेदांत सोसायटी के स्वामी ईश्वर समर्पण के अनुसार योग धीरे धीरे असर करता है और वह स्थाई होता है।
स्वामी समर्पण के योग केंद्र में आसन प्राणायाम के साथ ध्यान धारणा आदि का अभ्यास भी कराया जाता है। उनका कहना है कि संस्थान का ध्यान सेहत से ज्यादा आत्म विकास के लिए केंद्रित है। इस उपक्रम में योग की स्पर्धा में प्रचारित एरोबिक्स जैसे अभ्यासों के तुलनात्मक अध्ययन पर ध्यान गया। अध्ययन में नतीजे सामने आए कि योग के प्रभाव ज्यादा असरदार हैं।
उनका कहना है कि योग के आसन कभी किताबों से सीखकर सिद्ध नहीं होते। इन्हें प्रशिक्षित योगाचार्यों से ही सीखना अच्छा होता है। ध्यान आदि के लिए आसन किए जा रहे हों तो अलग बात है। उनमें शरीर पर जोर नहीं पड़ता जबकि शरीर और मन दोनों को साधने के लिए किए गए अभ्यास की बात अलग है।
शरीर साधने के लिए योग का अभ्यास निरापद है पर उसमें भी सावधानी जरूरी हैं। एक खतरा तो यही है कि योगासन करते समय सांस लेने की प्रकिया थोड़ी भी गड़बड़ाई तो नुकसान हो सकता है। इससे मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में कमी हो सकती है और ब्लैक आउट भी हो सकता है।
पैदल चलना और योगासन करना किसी के लिए भी सबसे सुरक्षित शुरुआती कसरत है। पैदल चलने में फिर भी शरीर पर दबाव पड़ सकता है लेकिन योग ज्यादा आसान है। इसमें सांस लेने और आसन करने की असंख्य तकनीकें मौजूद हैं। पैदल चलने और एरोबिक्स की कसरतों में पसीना बहाने में भले ही लाभ जल्दी हो पर उससे थकान भी जल्दी आती है।
योग के आसनों को तनाव दूर करने वाला माना जाता है। इसीलिए ध्यान और आध्यात्मिक प्रयोजनों के अलावा तन मन के लिए किए जाने वाले ध्यान विशेषज्ञ की निगरानी में करनी चाहिए। वे प्रशिक्षक जिन्हें आसन सिद्ध हो चुका है उनके शरीर में पर्याप्त लचीलापन है साथ ही उन्हें श्वासन क्रिया में महारत भी हासिल हो उन्हीं के निर्देशन में योग करना चाहिए।