कहा तो गुड फ्रायडे जाता है, लेकिन यह सबसे दुखदयी दिन रहा जब ईसा मसीह या यीशु को क्रास पर चढ़ाया गया और उन्होंने प्राण त्यागे थे। एक दूसरी अभिव्यक्ति में इस दिन यीशु ने मनुष्य के लिए अपना बलिदान देकर निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। विरोध और यातनाएं सहते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
इस बलिदान के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कई विश्वासी चालीस दिन तक उपवास रखते हैं तो कोई केवल शुक्रवार को ही व्रत रखकर प्रार्थना करते हैं। प्रभु यीशु के वचनों को अमल करने का दिन है गुड फ्रायडे। कुछ विश्वासियों की राय में इस दिन का महत्व प्रभु यीशु को दी गई यातनाओं को याद करने और उनके वचनों पर अमल करने का है।
उनके अनुसार उपवास से ज्यादा सच्चाई का महत्व है। उपवास करते हैं तो प्रार्थना भी जरूरी है। इस दिन यीशु को क्रास पर चढ़ाया गया था। यीशु के बलिदान देने की वजह से ही इस दिन को गुड कहते हैं।
वैश्वीकरण के दौर में क्रिसमस को तो प्रचार मिला पर गुड फ्रायडे को नहीं क्योंकि इस दिन के साथ ग्लैमर नहीं जुड़ा है। इसी प्रकार ईस्टर ईसाइयों की नींव है। इस दिन प्रभु यीशु का पुनरुत्थान हुआ था।
क्रूस पर यीशु के प्राण त्यागने की घटना के महत्व को संसार की रचना और विकास की कई घटनाओं से जोड़ कर देखा गया है। यीशु के जीवन का गहनतम अध्ययन करने वालों तथा बाइबल की शिक्षाओं के जानकारों के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर यीशु के मरण तक की मुख्य घटनएं शुक्रवार को ही हुई हैं।
जैसे सृष्टि पर पहले मानव आदम का जन्म शुक्रवार को हुआ, प्रभु की आज्ञाओं का उल्लंघन करने पर आदम व हव्वा को शुक्रवार को अदन वाटिका से बाहर निकाल दिया गया। प्रभु ईसा शुक्रवार को गिरफ्तार हुए, जैतून पर्वत पर अंतिम प्रार्थना प्रभु ने शुक्रवार को की, प्रभु ईसा का अपमान व उन पर मुकदमा शुक्रवार के दिन ही चलाया गया।
शुक्रवार के दिन निर्दोष होते हुए भी ईसा को क्रूस पर चढ़ाया गया, जहां उन्होंने ऊंचे स्वर से पुकारकर कहा, हे पिता! मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ। यह कहकर उन्होंने प्राण त्याग दिया।
पापों में डूबी मानव जाति की मुक्ति के लिए अपने महान त्याग के लिए प्रभु ईसा मसीह ने भी शुक्रवार का ही चयन किया। यह मृत्यु मानव में सत्य, अहिंसा, क्षमा, प्रेम तथा त्याग की ज्योति जलाने हेतु ही थी। अतः इस शुक्रवार को पवित्र व शुभ माना जाता है।