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Tulsidas Jayanti 2025: 31 जुलाई को तुलसीदास जयंती, जिनके मन और कलम में बसते हैं श्रीराम

Wed, 30 Jul 2025 12:39 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Tulsidas Jayanti 2025: हर वर्ष श्रावण मास की सप्तमी को गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई जाती है। यह दिन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है। इस अवसर पर उनकी रचनाओं का पाठ, भजन-कीर्तन और विचार गोष्ठियों का आयोजन होता है।
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तुलसीदास जयंती 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Tulsidas Jayanti 2025: श्रावण मास की सप्तमी तिथि पर मनाई जाने वाली गोस्वामी तुलसीदास जयंती केवल एक संत की स्मृति नहीं, बल्कि भारतीय भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर का उत्सव है। तुलसीदास जी ने अपनी लेखनी से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने भक्ति को केवल पूजा नहीं, जीवन जीने की एक सजीव विधा के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाएँ आज भी धर्म, नीति और भक्ति के अमिट स्रोत हैं।
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1. तुलसीदास जयंती का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हर वर्ष श्रावण मास की सप्तमी को गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई जाती है। यह दिन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है। इस अवसर पर उनकी रचनाओं का पाठ, भजन-कीर्तन और विचार गोष्ठियों का आयोजन होता है। भक्त उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर भक्ति, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाने का संकल्प लेते हैं।

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2. रामभक्ति के अमर साधक
तुलसीदास जी ने अपने जीवन को भगवान श्रीराम की भक्ति में समर्पित कर दिया। वे सगुण रामभक्ति के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद से उन्हें राम दर्शन की अनुभूति हुई। उन्होंने भक्ति को जीवन की सबसे बड़ी साधना माना और अपने लेखन से लोगों को उस पथ पर चलने की प्रेरणा दी। उनकी भक्ति ने उन्हें एक साधारण कवि से संत बना दिया।

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3. रामचरितमानस: तुलसी की अमर रचना
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‘रामचरितमानस’ गोस्वामी तुलसीदास जी की कालजयी रचना है। यह वाल्मीकि रामायण का सरल और सरस हिंदी रूपांतरण है, जिसे उन्होंने अवधि भाषा में लिखा ताकि साधारण जन भी भगवान राम की लीलाओं को समझ सकें। यह ग्रंथ भक्ति, मर्यादा, धर्म, प्रेम, त्याग और आदर्श जीवन का अद्भुत संगम है। श्रीराम का आदर्श चरित्र आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का पथदर्शक है।

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4. हनुमान चालीसा और अन्य रचनाएं
तुलसीदास जी ने कुल 12 प्रमुख ग्रंथों की रचना की। इनमें 'हनुमान चालीसा' सबसे लोकप्रिय है, जिसे हर वर्ग और उम्र के लोग श्रद्धा से पढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त 'कवितावली', 'विनय पत्रिका', 'दोहावली', 'जानकी मंगल' आदि ग्रंथों में भी उनकी भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक अनुभूतियों का प्रभाव झलकता है। उनकी हर रचना लोकभाषा में होने के कारण सीधे हृदय तक पहुँचती है।

5. जीवन से प्रेरणा और आत्मबोध
गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन साधना, सेवा और संतुलित विचारों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने भक्ति को आडंबर से मुक्त कर सीधे आत्मा से जोड़ा। उनके ग्रंथों में न केवल धार्मिक भाव हैं, बल्कि जीवन जीने की व्यवहारिक शिक्षा भी निहित है। तुलसीदास जयंती हमें स्मरण कराती है कि सच्ची भक्ति वही है, जो हमें आत्मोन्नति की ओर ले जाए और समाज में सद्भाव फैलाए। 
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