उत्साह वास्तव में श्रेष्ठ पुरुषों का बल है। इससे बड़ा और कोई बल नहीं है। इस बात को महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में एक श्लोक के रूप में लिखा है। यह श्लोक इस प्रकार है -
उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् ।
सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चिदपि दुर्लभम् ॥
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए रामायण के इसी श्लोक का वर्णन किया जिसका अर्थ है उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना वायरस के चलते देशभर में लगे 21 दिनों के लॉक डाउन के बीच जनता के मनोबल को बढ़ाने के लिए रामायण के इस श्लोक का वर्णन किया। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से 5 अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक घरों की लाइट बंद कर दीपक, मोमबत्ती, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश जलाने की अपील की है।
आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को इस अपील के जरिए एक राजनैतिक शख्सियत के रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक गुरु के समान संकट की इस घड़ी में लोगों के उत्साह को बनाए रखने का मंत्र इस श्लोक के माध्यम से दिया है। उत्साहित व्यक्ति कभी भी मायूस नहीं होता है। उत्साह और जोश के कारण उसके अंदर नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के जीवन में भी बड़ा संकट आन पड़ा था। पहले 14 वर्ष का वनवास, फिर रावण द्वारा माता सीता का हरण और युद्ध में भाई लक्ष्मण का मुर्छित हो जाना ये सब परिस्थितियां भगवान राम के मनोबल को कमजोर करने लिए काफी थीं। परंतु बुराई के खिलाफ़ अच्छाई की जीत का उत्साह उनके मन में सदैव बना रहा और अपने उत्साह बल के कारण ही उन्होंने लंकापति रावण का वध किया। इसलिए कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ़ लड़ाई में हमारा मनोबल और उत्साह कमजोर नहीं पड़ना चाहिए।