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यहां से धन लेकर जा सकते हो....

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मनुष्य की आम धारण रहती है कि जब तक शरीर में प्राण बचा है जितना हो सके समेट लो। भगवान भी मनुष्य से ऐसा ही कहते हैं, लेकिन वह जिस धन को समेटने के लिए कहते हैं मनुष्य उस धन को सड़क के किनारे बिखरे हुए कंकर के समान समझता है। लोभवश मनुष्य ऐसे धन के पीछे बचैन रहता है जो कभी उसका हो ही नहीं सकता है।
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कबीरदास जी कहते हैं पंथी उभा पंथ सिर, बगुचा बांधा पूंठ। मारन मुंह आगे खड़ा, जीवन का सब झूठ।। इसका अर्थ यह है जिस तरह यात्री सामन लिए गाड़ी पकड़ने के लिए खड़ा रहता है, उसी तरह सांसारिक प्राणी भी अपने पाप-पुण्य की गठरी बांधे मृत्यु की प्रतीक्षा में खड़े रहते हैं।

इसलिए सोना, चांदी और जमीन-जायदाद रूपी जो भी धन है वह सब झूठ है। यह कभी साथ नहीं जाता है। यह मायारूपी संसार में उत्पन्न हुआ है और यहीं इसे रह जाना है। साथ जाएगा तो सिर्फ पाप और पुण्य। जिसके पास पुण्य का धन होगा वही धनवान होगा और सुख प्राप्त करेगा। इसलिए संत कहते हैं राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट। अंत काल पछताएगा जाएगा जब छूट।।
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असल धन यही है और बस एक यही धन है जो पुण्य का रूप धारण कर इस लोक से परलोक में साथ जाएगा। महर्षि बाल्मिकी इस सत्य से जबतक अनजान थे तब-तक डाकू बनकर लोगों को लूटा करते थे। लोग इनसे डरते थे।

जब सत्य का इन्हें ज्ञान हुआ तो राम नाम रूपी धन जमा करने लगे और संसार ने इन्हें महर्षि का पद दिया। अपने पुण्य रूपी धन के कारण बाल्मिकी जब-तक संसार है पूजनीय रहेंगे। इसलिए हमेशा पुण्य रूपी धन को जमा करना चाहिए क्योंकि यही साथ जाएगा।
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