आज स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है। इनका जन्म 1863 ई. कोलकाता में हुआ था। प्रखर बुद्धि के स्वामी विवेकानंद वेदान्तों के ज्ञाता थे। महज 30 साल की उम्र में ही इन्होंने अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अपने संबोधन भाषण से ही विवेकानंद जी ने महासभा में उपस्थित लोगों का हृदय जीत लिया था।
अपने समय के महान विद्वान और अध्यात्मिक पुरूष विवेकानंद जी 39 वर्ष की उम्र में ही परमधाम चले गये। कहते हैं सूर्य की रोशनी कुछ पल के लिए ही पृथ्वी पर पड़ती है तो जीवन का संचार कर जाती है।
स्वामी विवेकानंद जी भी ऐसे महापुरूषों में से हैं जिनमें सूर्य के समान जीवन का संचार करने की योग्यता थी। इनके जीवन की कई ऐसी घटना है जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। विवेकानंद के जीवन का एक ऐसा ही प्रेरक प्रसंग उन दिनों का है जब वह अमेरिका की यात्रा पर थे।
एक स्थान से गुजरते हुए विवेकानंद ने देखा कि कुछ लड़के नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगा रहे हैं। लेकिन किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा। विवेकानंद आगे बढ़े और एक लड़के से बन्दूक ले ली और खुद निशाना लगाने लगे। उन्होंने पहला निशाना लगाया और वो बिलकुल सही लगा। इसके बाद इन्होंने कुल 12 निशाने लगाये और सभी सटीक लगे।
विवेकानंद के अचूक निशाने को देखकर सभी लड़के चकित रह गये। लड़कों ने पूछा आप भला ये कैसे कर लेते हैं? स्वामी जी ने कहा, “तुम जो भी काम करो उस पर अपना पूरा दिमाग लगाओ। तुम निशाना लगा रहे हो तो तम्हारा पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर होना चाहिए। जब तुम ऐसा करने लगोगे तब कभी नहीं चूकोगे। तुम अपना पाठ पढ़ रहे हो तो सिर्फ पाठ के बारे में सोचो।”