सफलता के लिए सर्वोत्तम करें, शिकायत नहीं- अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो सफलता को खोजिए मत, बल्कि योग्य और समर्थ बनिए। आप जो सर्वोत्तम कर सकते हैं, उससे थोड़ा भी कम मत कीजिए। अपने बॉस के बारे में मन में असंतोष पालने की बजाय, आप अपना काम इतनी अच्छी तरह से कीजिए कि आपके बिना आपके बॉस का और आपकी कंपनी का काम ही न चले।
आप खुद को उनकी एक जरूरत बना दें। जो लोग ‘टॉप’ तक पहुंचे हैं, उन्होंने तरक्की इसलिए की, क्योंकि उन्होंने बेहतरीन काम किया, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, न कि शिकायत। अगर आप सचमुच कुछ करना चाहते हैं, तो जरूरी है कि आप अपनी जिंदगी में इस पंचामृत को उतार लें...
इस सच को पहचानें
डर हमेशा उसके बारे में होता है, जिसका अभी अस्तित्व नहीं है, या कभी होगा भी नहीं। आप गैर-मौजूद चीज को लेकर इसलिए परेशान होते हैं, क्योंकि आप हकीकत में रहने के बजाय उस ख्याली दुनिया में रहते हैं।
यह लगातार अतीत का भक्षण कर भविष्य में झांक रही है। अगर आप वर्तमान में मौजूद चीजों में मग्न रहें तो फिर डर के लिए कोई जगह ही नहीं बचेगी।
यह काम भूल कर भी नहीं करें
जब कोई इंसान आपके मन मुताबिक काम नहीं करता, तब आप उदास होकर बैठे रहते हैं यह सोचकर कि आप दुखी रहकर कुछ हासिल कर लेंगे। क्लेश में रहने का फैसला आपका खुद का है।
असलियत में खुशी आपके भीतर है, लेकिन आप उसे दूसरे लोगों और चीजों के जरिए हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए आप हमेशा उनकी दया पर निर्भर रहते हैं। शरीर को कष्ट आ सकता है, लेकिन क्लेश की रचना आपके दिमाग की ही है।
दूसरों से इन बातों में तुलना न करें
अधिकतर लोग इसलिए दुखी रहते हैं कि उनके पास वह नहीं है जो दूसरों के पास है। आपके पास सिर्फ मोटरसाइकिल है, दूसरे के पास कार है।
आपके पास छोटा घर है, दूसरे के पास आलीशान घर है। तुलना करने की बेवकूफी का यह खेल कभी खत्म नहीं होता और आपको पीड़ा देता रहता है।
इस एक चीज को जीवन से निकाल दें
अगर आप चीजों को वैसे ही स्वीकार करते हैं, जैसी कि वे हैं, तब आप प्रसन्नचित रहेंगे। अगर आप चीजों का विरोध करते हैं, उनके खिलाफ हो जाते हैं, तो जीवन कष्टपूर्ण हो जाएगा।
आप खिलाफ इसलिए होते हैं, क्योंकि चीजें आपकी उम्मीद के मुताबिक से नहीं हुईं। आप चीजें स्वीकार इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि ऐसा करने से आपके अति-संवेदनशील ’अहं’ को ठेस लगती है। इसलिए अपने अहं को हावी न होने दें।
अपनी इच्छा से करें हर काम
आप जो काम अपनी इच्छा से करते हैं, उसमें आपको आनन्द आता है और बेमन से किया गया काम आपको पीड़ा पहुंचाता है।
आपको जो भी काम दिया गया है, जब उसे आप अपना काम समझकर मन लगाकर करेंगे, तब आपको स्वतः आनंद आएगा। जबकि उसी काम को किसी दूसरे का मानने पर आपमें ऊब पैदा होगी।