फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब उस महिला ने शिव के अवतार से कामशास्त्र पर प्रश्न करना शुरु किया

विज्ञापन
विज्ञापन
भविष्य पुराण में भगवान बताया गया है कि भगवान शिव का एक अवतार वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि को हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 4 मई को है। भगवान शिव के इस अवतार का नाम है शंकर जो अपनी विद्वता के कारण शंकराचार्य कहलाए। ऐसी मान्यता है कि 32 वर्ष के अल्प जीवन काल में ही इन्होंने ने भारत के चारों दिशाओं में चार धाम ब्रदीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी की स्थापना की।
विज्ञापन


केदारनाथ को पुनः प्रतिष्ठित करने वाले भी शंकाराचार्य माने जाता हैं। इसके अलावा इन्होंने जोशीमठ को भी परम पावन स्थान के रूप में मान्यता दिलायी। शंकराचार्य ने सात वर्ष की उम्र में संन्यास ग्रहण कर लिया था। इस उम्र ही इन्होंने वेदों, पुराणों, उपनिषदों एवं रामायण और महाभारत को याद कर लिया।
Trending Videos

शंकराचार्य का चमत्मकार

इनके विषय में एक कथा है जो काफी प्रसिद्घ है, इनके गांव से काफी दूर पूर्णा नदी बहा करती थी। माता की बढ़ती उम्र को देखकर इन्होंने नदी को अपने गांव के नजदीक से बहने के लिए कहा।

इनकी प्रार्थना पर नदी ने रुख बदल लिया और कालाड़ी ग्राम के निकट बहने लगी। इससे इनकी माता को प्रतिदिन नदी स्नान करने में सुविधा हो गयी।

कामशास्त्र पर प्रश्न करना शुरू किया

इतने ज्ञानी और आध्यत्मिक शक्तियों के स्वामी होने के बावजूद जब इनका सामना मण्डन मिश्र की पत्नी भारती से हुआ तब इन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। शंकराचार्य पूरे भारत में धार्मिक एकता स्थापित करना चाहते थे। इसलिए जरूरी था कि सभी विद्वानों की विचारधारा एक बने।

इसलिए देश भर के विद्वानों को शास्त्रार्थ में हराते हुए वह बिहार के कोशी तट पर बसे बनगांव महिषी पहुंचे। यहां पर इन्होंने मण्डन मिश्र नाम के विद्वान से शास्त्रार्थ किया। 18 दिनों तक शास्त्रों पर तर्क वितर्क होने के बाद मण्डन मिश्र पराजित हो गये।

तब इनकी पत्नी भारती ने कहा कि पत्नी पति का आधा अंग होती है इसलिए आपने अभी आधे अंग को ही हराया है। इसके बाद भारती ने कामशास्त्र पर प्रश्न करना शुरू कर दिया।
विज्ञापन

एक महीने तक सौ कन्याओं का साथ

बाल ब्रह्मचारी होने के कारण शंकराचार्य कामशास्त्र पर कोई उत्तर नहीं दे पाये। भारती के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए इन्होंने एक महीने का समय मांगा। शंकराचार्य ने योग बल से जाना कि कश्मीर का राजा मरने वाला है। इसके बाद इन्होंने अपना शरीर शिष्यों के सौंप दिया और दूसरे के शरीर में प्रवेश करने की विद्या से राजा के मरते ही उसके शरीर में प्रवेश कर गये।

राजा के सौ सुन्दर रानियां थी। इनके साथ इन्होंने एक माह तक भोग-विलासपूर्ण जीवन बिताया। इसके बाद पुनः अपने शरीर में लौट आये और कामशास्त्र से संबंधित भारती के प्रश्नों का उत्तर दिया। इसके बाद मण्डन मिश्र को पराजय स्वीकार करनी पड़ी और यह शंकराचार्य के अद्वैतमत को मानने लगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें