एक मशहूर इंजीनियर ने दो शहरों के बीच एक नदी पर पुल बनाने का प्रस्ताव रखा। सबने उसका खूब मजाक उड़ाया, क्योंकि उससे पहले किसी ने नदी पर पुल बनाने के बारे में सोचा नहीं था। पर इंजीनियर को अपने और अपनी योजना पर पूरा विश्वास था। उसने अपने सभी दोस्तों से पुल बनाने के लिए मदद मांगी। पर सभी दोस्तों ने उसकी खूब खिल्ली उड़ाई।
अंत में उसने अपने इंजीनियर बेटे को पूरी योजना समझाई। बेटे ने पिता पर विश्वास जताते हुए काम शुरू कर दिया। काम बहुत जोखिम भरा था। ऊपर से समाज में हर कोई उस पर पैनी निगाहें जमाए हुए था। एक दिन पिता और बेटा, दोनों काम करते हुए एक हादसे की चपेट में आ
गए।
पिता की जान चली गई और बेटा अपंग हो गया। बेटे की पत्नी ने दूसरे इंजीनियरों से पुल पूरा करने के लिए मदद मांगी, पर कहीं से सफलता नहीं मिली। काम ठप हो गया। बेटा अपने बिस्तर पर बेजान पड़ा था कि एक दिन हवा के झोंके ने उसके पास की खिड़की का पर्दा हटा दिया। उसे खुला नीला आसमान दिखने लगा और वह पुल दिखने लगा, जिसकी कल्पना उसके पिता ने की थी।
बेटे को लगा कि यह एक संदेश है कि काम आगे बढ़ाना चाहिए। उसने पत्नी के माध्यम से सभी कर्मचारियों को निर्देश देने शुरू किए। धीरे-धीरे पत्नी भी इंजीनियरिंग की भाषा समझने लगी। अगले तेरह साल तक काम का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। बेटे के निर्देश, उसकी पत्नी की मदद और कर्मचारियों की मेहनत से अंततः पुल बन गया।
वह पुल आज ब्रुकलिन ब्रिज के नाम से जाना जाता है। यह पुल न्यूयॉर्क और ब्रुकलिन शहर को जोड़ता है। जिस इंजीनियर ने इस पुल की कल्पना की, उसका नाम था जॉन रुब्लिंग। उसके बेटा वाशिंगटन रुब्लिंग ने बिस्तर पर पड़े रहकर पुल बनाने में सफलता हासिल की।