निमित नामक एक बच्चे की कहानी, जिसे ज्यादा लालच करने का खामियाजा भुगतना पड़ा।
निमित छठी कक्षा में पढ़ता था और स्कूल का हीरो था। एक दिन उसकी प्रधानाचार्या ने उसे बुलाकर कहा, अगली क्लास में पांच सेक्शन बन रहे हैं। चूंकि तुम हमारे स्कूल के सबसे होनहार विद्यार्थियों में से हो, इसलिए हम तुम्हें यह विकल्प दे रहे हैं कि तुम जो चाहो, वह सेक्शन ले लो। लेकिन शर्त बस इतनी-सी है कि तुम्हें एक-एक कर सारे सेक्शन दिखाए जाएंगे। तुम तभी हां या ना कर सकते हो।
एक बार उस सेक्शन से निकल कर दूसरे सेक्शन में पहुंच गए, तो हां या ना का मौका नहीं मिलेगा। निमित ने सोचा, इसमें कौन-सी बड़ी बात है। वह टीचर के साथ सेक्शन देखने निकल पड़ा। पहले सेक्शन में घुसते ही उसने देखा वहां की दीवारें बहुत सुंदर सजी हैं और उनमें कई रंग-बिरंगे चार्ट्स लगे हुए हैं। पर उस सेक्शन में उसके कम ही दोस्त थे। यह देख वह अगले सेक्शन की ओर बढ़ गया। वह सेक्शन और भी सुंदर था।
वहां एक छोटा-सा कंप्यूटर रखा था और पानी पीने के लिए एक फिल्टर की भी व्यवस्था थी। पर निमित को लगा कि अगला सेक्शन तो और भी सुंदर होगा। अगले सेक्शन में उसके सारे दोस्त मौजूद थे। उस क्लास में एक बड़ा-सा स्क्रीन और प्रोजेक्टर रखा था और दीवारें ज्यादा खूबसूरत थीं। निमित के मन में आया कि यहीं रुक जाऊं। पर उसने नजरें बचाकर अगले सेक्शन की खिड़कियों को देखा, जिस पर गहरे काले पर्दे लगे थे।
उसने सोचा, क्या पता, काले पर्दों के पीछे पूरा ब्रह्मांड हो। लिहाजा वह उस क्लास से भी निकल गया। आखिरी सेक्शन में जाकर उसने देखा कि दीवारों पर कई जगह से पेंट उखड़ रहा है। न कंप्यूटर, न फिल्टर और पर्दे भी धूल भरे। तभी प्रधानाचार्या ने उससे कहा, मुझे खुशी है कि तुमने यह सेक्शन चुना। इससे दो फायदे हुए। एक तो तुम्हें यह सबक मिला कि लालच करना बुरी बात है। और दूसरा यह कि अब तुम इस सेक्शन को अपनी तरह सजा सकोगे और कमजोर बच्चों का उद्धार कर सकोगे।