श्री श्री रविशंकर का 57वां जन्मदिवस 13 मई को कर्नाटक के आर्ट ऑफ लिविंग केन्द्र में बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। दो दिनों तक चलने वाले जन्मोत्सव को कर्नाटक वैभव उत्सव का नाम दिया गया। जन्मदिन से एक दिन पहले ग्राम देवता उत्सव मनाया गया जिसमें कर्नाटक के विभिन्न गांवों एवं कस्बों के देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था।
श्री श्री रविशंकर के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए 1000 देवी देवता पधारे। जिनका श्री श्री रविशंकर ने विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक वैभव, ज्ञान और कला को मंच भी प्रदान किया गया। 1000 देवी देवताओं के साथ श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भारत के विभिन्न प्रांतों एवं विदेशों से भी इनके अनुयायी मौजूद थे।
ग्राम देवता उत्सव के अवसर पर श्री श्री रविशंकर ने कहा कि संस्कृत में एक शब्द है की निलिम्प परिषद् जैसे-विधान परिषद् है। वैसे ही देवताओ का भी एक परिषद् है। हर गांव में ग्राम देवता होते हैं जिसे- क्षेत्रपाल कहते है। यह एक क्षेत्र के अधिकारी पालन करने वाला, पालनहार होते हैं। ग्राम देवता का यह कार्य होता है कि गांव में रहने वाले सभी सुखी और समृद्घ हों।
गांव के सभी लोग इनको मानते हैं। इनकी आराधना करते है। जाति, मतभेद सब छोड़कर हम दैवी शक्ति के आधीन हैं। गांव के लोग जब यह देख लेते हैं कि हम सभी भगवान के अधीन हैं तो वह दास भाव से काम करता है न कि मालिक होकर। यह बात याद दिलाने के लिए यह उत्सव माना रहे हैं।
जन्मदिन के दिन पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया जिसमें श्री श्री रविशंकर ने समाज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पांच लोगों को सम्मानित किया। इसमें वैदिक साहित्य में योगदान के लिए श्री सुधाकर चतुर्वेदी को पुरस्कृत किया गया।