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महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अपराध का समाधान

Tue, 10 Dec 2013 01:05 PM IST
भानुमति नरसिम्हन
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हाल ही में वाशिंगटन डी.सी. में महिला नेताओं की एक संगोष्ठी आयोजित की गयी थी। इसमें चर्चा की गई कि, महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मुद्दा सिर्फ भारत केंद्रित नहीं है। यह पूरे विश्व की समस्या है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को केवल महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे रुप में देखा जाता है जबकि ऐसा नहीं देखना चाहिए।
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यदि महिलाएं अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं तो कहीं समाज का ताना बाना टूट चुका है। यह एक मानवाधिकार का मुद्दा है, और पुरुषों एवं महिलाओं को इस अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए और इसका समाधान ढूंढने के लिए एक साथ खड़े होना चाहिए। हमें विश्व स्तर पर हाथ मिलाकर मानवीय मूल्यों को पुन: स्थापित करने के लिए और महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को रोकने के लिए मिलकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।

भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से पुरुषों और महिलाओं को जीवन के सभी पहलुओं में बराबर का दर्ज़ा देकर सम्मानित किया गया है। इस सम्मान को ईश्वर के अर्धनारीश्वर रूप में आधा पुरुष व आधा महिला दिखा कर निरूपित किया गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि दोनों सृष्टि के संरक्षण व पोषण में बराबर के भागीदार हैं।
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यहां तक कि हमारे शरीर में कोशिकाओं के स्तर पर भी प्रत्येक जीन में पिता व मां दोनों की भागीदारी है। प्रत्येक व्यक्ति में उन दोनों ऊर्जाओं का संतुलन है। यह वही सिद्धांत है जिसे पुरुष और प्रकृति (यिन और यांग) के द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया है। एक स्वस्थ प्रगतिशील समाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति के भीतर इनका संतुलन भली भांति से बना रहना चाहिये। हमें महिलाओं का और उनकी भूमिका का सम्मान अवश्य ही करना चाहिए।

महानगरों में बढ़ती घटनाओं की संख्या एक चिंता का विषय है। यह हमें महिलाओं के प्रति हो रहे अन्याय व हिंसा के प्रति सजग कर रही है। हम पूर्णतः उन लोगों का समर्थन करते हैं जिन्होंने इसके विरोध में कदम उठाया है। यह उनकी अन्तर्शक्ति को दर्शाता है। वह लड़ना चाहते हैं और उनकी न्याय की मांग को सुना जाना चाहिये और उन्हें पूरा समर्थन मिलना चाहिए। हालांकि समाधान के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

हमें यह भी समझने की ज़रूरत है कि चिंता और आक्रामकता के द्वारा कोई समाधान नहीं निकल सकता। हमें एक शांत मन की जरूरत है और ऐसे ही स्पष्ट मनोस्थिति से यह निर्णय लेना है कि हमें किस के लिए लड़ना है और वह कैसे होगा? हम शांति व स्पष्टता से ही इन मुद्दों से निपटने के लिए दीर्घकालीन स्थायी समाधान निकाल सकते हैं।

हमारी संस्कृति का आध्यात्मिक ज्ञान हमें शांति का ऐसा वातावरण प्रदान कर सकता है। हमें ऐसे आध्यात्मिक गुरुओं के दिखाए हुए मार्ग का अनुसरण करना चाहिये जिन्होंने समाज में मानवीय मूल्यों को संरक्षित व पोषित करने के लिए, एवं प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए, स्वयं को समर्पित कर दिया हो।

हमें सभी पुरुषों और महिलाओं में करुणा की भावना जागृत करने की आवश्यकता है। यहीं पर ध्यान, प्राणायाम और साधना की विधियाँ मदद करती हैं। वे हमें संचित तनाव से मुक्त करके मन को फिर से ताज़ा और पुनर ऊर्जित कर के उचित निर्णय लेने के लिए सक्षम बना देती हैं। यह दुख की बात है कि दुनिया भर के समाज में यह बीमारी फैली हुई है। जहां इन घटनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने में मीडिया की एक महत्वपूर्ण भूमिका है, वहीं मीडिया इस चर्चे को समाधान की ओर भी मोड़ सकती है।

अक्सर, केवल नकारात्मक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने से भय और चिंता का एक दुष्चक्र पैदा हो जाता है। इसके बजाय यदि मानवीय मूल्यों और जीवन में आध्यात्मिकता की भूमिका पर अधिक ध्यान केंद्रित करें तो हम मित्रता और दया का वातावरण बनाने में मदद कर सकते हैं।

जब अपने आसपास के लोगों के साथ हम अपनापन महसूस करते हैं तो अन्याय को रोकने के लिए हम अधिक तत्पर रहेंगे। समाज में महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में एक अन्य महत्वपूर्ण कारक सरकार की प्रभावशीलता है। इसके अलावा अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही का क़ानून लागू होना आवश्यक है।

हमें समाज में शराब के सेवन से उत्पन्न खतरे के सम्बन्ध में बोलने की भी जरूरत है। शराब पीना अक्सर एक फैशन या स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में दर्शाया जाता है। परन्तु वास्तविकता यह है कि नशे के प्रभाव में एक शिक्षित सुसंस्कृत व्यक्ति भी असभ्य व्यवहार करने लगता है। विकसित देशों में भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा की कई घटनाओं की जड़ शराब का सेवन है।

तथापि हमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह समझना है कि सामाजिक बुराइयों का मूल कारण मानवीय मूल्यों का पतन है। हम में से हरेक को आगे आना है और अपनेपन की भावना, मिल कर रहने के मनोभाव व सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहने के आध्यात्मिक मूल्यों को पोषित करना है जो कि एक स्वस्थ, खुशहाल और सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने का मूलभूत आधार है।
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अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन, आर्ट ऑफ लिविंग
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