फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भगवान भोलेनाथ को तीन पत्तों वाला बेलपत्र चढ़ाने का मतलब क्या है?

Tue, 17 Feb 2015 04:44 PM IST
श्री श्री रविशंकर/अध्यात्मिक गुरु
विज्ञापन
विज्ञापन
शिवरात्रि माने शिव में आश्रय लेना। और शिव है-शांति, अनंतता, सौन्दर्य और अद्वैत। तुम शिव में आश्रय लेते हो क्यूं कि तुम्हारा सच्चा स्वभाव शिव है क्यूँ कि वे समग्र ब्रह्माण्ड की ध्यानस्थ अवस्था हैं।
विज्ञापन


अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रमाणित किया था कि उर्जा न तो उत्पन्न, और न ही नष्ट की जा सकती है; यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित की जा सकती है। वह उर्जा, जो एक से दुसरे में रूपांतरित होती है, उसे शिव कहते हैं।

शिव वह आनंदमय व निश्छल चेतना है जो ब्रह्माण्ड के प्रत्येक अणु में तथा  हमारे भीतर भी उपस्थित है। अपने भीतर के शिव तत्व का उत्सव मनाना शिवरात्रि है। "रात्रि" का अर्थ है रात, विश्राम और आराम का समय। जब सभी क्रियाएँ ठहर जातीं हैं, शरीर सो जाता है। शिवरात्रि विश्राम है, न ही केवल शरीर के लिए, लेकिन मन, बुद्धि व अहंकार के लिए भी।
विज्ञापन


विरोधाभासी ढंग से, 'शिव तत्व' का अर्थ जागृत हो जाना भी होता है। इस प्रकार शिवरात्रि सभी प्रकार की निद्राओं से जागृत हो जाने का भी अवसर है। यह सो जाने वाली रात्रि नहीं है बल्कि जगे हुए रहने की रात्रि है। यह जो कुछ भी हमारे पास है उसके प्रति सजग होने और उसके लिए कृतज्ञ होने का भी प्रतीक है। वह सुख जिसने उन्नति को आगे बढाया और जिस ने जीवन को गहराई दी उस दुःख के लिए भी कृतज्ञ हो जाओ। ये शिवरात्रि मनाने का सही तरीका है।

कैलास (शिव का आवास) का अर्थ है उत्सव। चाहे संयास हो या संसार, तुम शिव से बच नहीं सकते क्यूं कि जहाँ उत्सव है वहां शिव है। सदैव उनकी उपस्थिति को महसूस करना ही शिवरात्रि का सार है। यह असली संयास है। ईश्वर को कुछ भी अर्पण किए बिना कोई पूजा सम्पूर्ण नहीं है। शिव बड़े भोले भगवन है; वे निर्दोष हैं- भोलानाथ।

हमें उन्हें केवल विल्व पत्र अर्पण करना होता है। लेकिन इस सरलता में एक गहरा सन्देश है। विल्व पत्र का चढ़ावा हमारे स्वभाव के तीन पहलुओं के समर्पण का प्रतीक है-तमस, रजस और सत्व। तुम्हें जीवन की सकारात्मकता व नकारात्मकता शिव को समर्पित करके चिंतामुक्त हो जाना है।

सर्वश्रेष्ठ चढ़ावा तुम स्वयं हो। अपने आप को अर्पण करना जीवन के सुख की चाबी है। आखिरकार, तुम दुखी क्यूं होते हो? मुख्यतया इसलिए कि जीवन में तुम कुछ सिद्ध करने में असमर्थ हो। ऐसे समय में तुम्हें अंतर्यामी इश्वर को सब कुछ समर्पण कर देना चाहिए। इश्वर को समर्पण करना महानतम शक्ति है। ये सागर में बूंद जैसा है। यदि बूंद अलग रहे, तो नष्ट हो जाएगी। लेकिन जब वह सागर बन जाती है, वह अविनाशी हो जाता है।
विज्ञापन


www.artofliving.org/webcast
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें