अपने यहां एक ऐसी जीवन शैली है, जहां लोग अपनी मर्जी से खुद को दास बना लेते हैं। आप तुलसीदास, कृष्णदास, या किसी और तरह के ‘दास’ को जानते हैं? वे खुलेआम कहते हैं, ‘मैं एक दास हूं।’ वे पायदान के रूप में इस्तेमाल किए जाने से डरते नहीं हैं। बल्कि पायदान बनना चाहते हैं।
यह प्यार परम मिलन के लिए होता है, सिर्फ निजी मकसद के लिए नहीं। परम मिलन की खोज में हैं, तो प्यार अलग तरीके से होना चाहिए। आपको शिष्ट तरीके से यह देखना होगा कि ‘इस प्यार से किसको क्या मिलता है।’ अगर कोई जरूरत से ज्यादा दूसरे का इस्तेमाल करता है, तो नतीजा यह होगा कि ‘अगर तुम मुझे यह नहीं दोगे, तो मैं तुम्हें वह नहीं दूंगा’।
यह एक सामाजिक चीज है। वरना, अगर आप परम मिलन चाहते हैं, तो आपको इन सब चीजों के बारे में नहीं सोचना चाहिए। या दूसरे शब्दों में, अगर प्यार एक खास स्तर से आगे चला जाता है, तो आप हमेशा सुरक्षित रहने की मानसिकता छोड़ देते हैं, और अपने-आप एक तरह से आघात-योग्य बन जाते हैं।
हमेशा सुरक्षित रहने की मानसिकता छोड़े बिना, कोई प्रेम संबंध नहीं हो सकता। सच्चे प्रेम के लिए, आपको प्रेम में गिरना होता है। जब आप गिरते हैं, तो कोई आपको उठा सकता है, या कोई आपको कुचल कर भी जा सकता है।