बड़ा आम वह हैं जो अपने हृदय के खून से दूसरों के लिए रास्ता बनाता हैं। एक आदमी अपने शरीर को पाट कर पुल बनाता है और सैकड़ों उस पर चलकर पार करते हैं। स्वामी विवेकानंद