वर्षा के जल के समान कोई जल नहीं। खुद की शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं। नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश नहीं। अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं। आचार्य चाणक्य