रूप और यौवन से सम्पन्न तथा कुलीन परिवार में जन्म लेने पर भी विद्या विहीन मनुष्य पलाश के फूल के समान होता है जो यह सुन्दर है, लेकिन खुशबु रहित होता है। आचार्य चाणक्य