हम कितने समय तक जिएंगे इसका कोई ठिकाना नहीं। हम कहां रहेंगे यह भी पक्का नहीं। कोई बात यहां पक्की है तो वह है हमारा अर्जित पुण्य। आचार्य चाणक्य