अटलांटिक महासागर में गोताखोरों ने समुद्र की तलहटी में कुछ ऐसे खंडहर और संरचनाएं देखी हैं, जिनसे लगता है कि पहले वहां कोई द्वीप था, जो भारी विप्लव के कारण समुद्र के गर्भ में समा गया।
रूस और चीन के बीच गोवी रेगिस्तान के बारे में कहते हैं कि वहां पहले समुद्र था। कभी प्रकृति में उथल पुथल हुई और जल सिमट कर एक ओर चला गया। वहां पृथ्वी निकल आई और कालातंर में वहां रेगिस्तान में बदल गई।
शतपथ ब्राह्मण तथा सूर्य सिद्धान्त आदि प्राचीन ग्रंथो में प्रलय की गणनाएं दी गईं हैं। उस आधार पर और प्रचलित हिसाब से अनुमान लगाना तो कठिन है, लेकिन यह तय है कि पृथ्वी में कभी-कभी अग्नि, हिम या जल प्रलय जैसी उथल पुथल और विनाश होते रहे हैं। ऐसी कितनी ही उलट फेर या संघातों के बारे में भूगर्भवेत्ता और इतिहासवेत्ता भी बताते रहे हैं।