मनुष्य सभी तरह का आहार लेता और पचाने की क्षमता नहीं हो तो भी उसे अर्जित कर लेता है। खाने और स्वाद के प्रति इस ललक को पूरा करते हुए मनुष्य उसके बुरे असर को दवाओं से रोकने की कोशिश करता है और कर भी लेता है। पर आयुर्वेद और अध्यात्म के निष्कर्ष जैसे खान-पान के बारे में भी आत्यंतिक हैं।
सामान्य जीवन में फिर भी खान-पान को लेकर थोड़ी शिथिलता सहन की जा सकती है लेकिन जिन्हें आत्मिक जीवन में थोड़ा भी कुछ करना होता है उन्हे कम खाने, भूख लगने पर खाने और कायदे से खाने के नियम का पालन करना होता है। एक अध्ययन के मुताबिक कम खाने और कायदे का खाने से मस्तिष्क अधिक सक्रिय रहता है।
वैज्ञानिक इस तथ्य से लंबे अरसे से वाकिफ थे, लेकिन अब इटली के अनुसंधानकर्ताओं ने यह पता लगाया कि कम खाना याददाश्त को बढ़ाता है। खाने के बाद सात्विक पेय और मीठा याददाश्त के साथ-साथ शरीर को भी चुस्त दुरुस्त रखता है।
रोम में सेक्रेड हार्ट कैथोलिक (एसएचसी) यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो रात के खाने के बाद काफी भी चुस्ती फुर्ती को बरकरार रखती है। ताजा, हल्का फुल्का और भूख से कम किया गया भोजन शरीर को स्वस्थ रखने के अलावा मन को भी एकाग्र और शांत रखता है। एसएचसी यूनिवर्सिटी के अनुसंधान कर्ताओं के अनुसार इससे शरीर में जरूरत के हिसाब से सीआरईबी नामक प्रोटीन का संचय होता है।
यह प्रोटीन याददाश्त बढ़ाने और सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग विद्या के जानकारों के अनुसार भोजन जितना सात्विक और सीमित होगा, शरीर उतना ही ध्यान और समाधि के अनुकूल होता जाएगा।