आध्यात्मिक जगत में ओशो एक ऐसा नाम है जिसने सम्पूर्ण विश्व
के रहस्यवादियों, दार्शनिकों और धार्मिक विचारधाराओं को नवीन अर्थ दिया। आज आशो का
81वां जन्म दिन है। आज के दिन ही 1931 में इनका जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में
हुआ था।
ओशो ने आध्यात्म और संन्यास की नई परिभाषा गढ़ी। इन्होंने परिवार
और समाज में रहते हुए जीवन के दायित्वों का निर्वाह करना ही सच्चा संन्यास बताया।
इनका मानना था कि संन्यास वह नहीं है कि भगवा वस्त्र पहन लिया और लोगों को उपदेश
देना शुरू कर दिया। इस तरह के संन्यास को ओशो ने पाखंड बताया।
ओशो ने जो
संन्यास की परिभाषा बतायी उसे इन्होंने नव संन्यास का नाम दिया। ओशो ने संन्यास को
पुनः बुद्ध का ध्यान, कृष्ण की बांसुरी, मीरा के घुंघरू और कबीर की मस्ती दी।
इन्होंने यह बताया कि देश में हजारों वर्षों से प्रचलित संयास त्याग का दूसरा नाम
है, वह जीवन से भगोड़ापन है, पलायन है। क्योंकि आपने घर-परिवार छोड़ दिया, भगवे
वस्त्र पहन लिए, चल पड़े जंगल की ओर और हो गये अपने सामाजिक और पारिवारिक दायित्व
से मुक्त।
इन्होंने बताया कि इस तरह के संन्यास की प्रवृति से श्रीकृष्ण के समय
गूंजे बांसुरी के गीत खो गए। राजा जनक के समय संन्यास में जो गहराई छुई थी, वह
संसार में कमल की भांति खिलकर जीने वाला संन्यास नदारद हो गया।
ओशो ने
संन्यास के साथ प्रेम की अलग परिभाषा गढ़ी। इन्होंने बताया कि प्रेम बंधन का नाम
नहीं है। प्रेम जब खुला होता है, जिसमें बंधन नहीं होता है वह प्रेम मंदिर के समान
होता है। लेकिन जब प्रेम समर्पित हो जाए उसे एक मात्र प्रेमी के अलावा अन्य के साथ
हंसने-बोलने की इजाजत नहीं हो तब वह प्रेम कारावास बना जाता है। इन्होंने प्रेम को
ही प्रार्थना कहा।
ओशो ने सैकडों पुस्तकें लिखीं, हजारों प्रवचन दिये। उनके
प्रवचन पुस्तकों, आडियो कैसेट तथा विडियो कैसेट के रूप में उपलब्ध हैं। अपने
क्रान्तिकारी विचारों से इन्होने लाखों अनुयायी और शिष्य बनाये। 'संभोग से समाधि की
ओर' इनकी सबसे चर्चित और विवादित पुस्तक है।
ओशो के दस सिद्धांत
1. कभी
किसी की आज्ञा का पालन न करे, जब तक के वो आपके भीतर से भी नहीं आ रही
हो।
२. अन्य कोई ईश्वर नहीं हैं, सिवाय स्वयं जीवन के।
3. सत्य आपके
अन्दर ही है, उसे बाहर ढूंढने की जरुरत नहीं।
4. प्रेम ही प्रार्थना
है।
5. शून्य हो जाना ही सत्य का मार्ग है। शून्य हो जाना ही स्वयं में
उपलब्धि है।
6. जीवन यही अभी है।
7. जीवन होश से जियो।
8.
तैरो मत - बहो ।
9. प्रत्येक पल मरो ताकि तुम हर क्षण नवीन हो
सको।
10. उसे ढूंढने की जरुरत नहीं जो कि यहीं है, रुको और देखो।