दादा जी की कहानी, जिन्होंने आतिफ को नेता जी की असलियत के बारे में बताया।
आतिफ दादा जी के साथ शाम को सैर पर निकला। रास्ते में उस इलाके के नेता जी मिल गए। उसके दादा जी और नेता जी में अक्सर तनातनी हो जाया करती थी। पर उस दिन दादा जी बहुत अच्छे मूड में थे। आतिफ ने कहा, दादा जी, पता नहीं, क्यों आपको नेता जी पसंद नहीं आते? जबकि वह तो हमारे लिए कितना काम करते हैं। दादा जी बोले, अच्छा, जरा मुझे भी तो बताओ। आतिफ बोला, मैंने देखा है, वह हर गरीब मुसलमान को मुफ्त खाना खिलाते हैं, उनकी हर जरूरत पर खड़े रहते हैं।
क्या यह सही नहीं? दादा जी मुस्कराए और बोले, सही तो है, पर सेवा नहीं। क्योंकि अगर सेवा करनी ही है, तो धर्म देखकर क्यों? पिछले हफ्ते मैं अपने एक दोस्त के घर गया था। उनका बेटा फौज में था। पिछले हफ्ते एक आतंकी हमले में उसकी मौत हो गई। पर न जाने क्यों, हमारे नेता जी के पास उसे श्रद्धांजलि देने के लिए समय नहीं निकल पाया। सरहद पर देश के सैकड़ों बेटे तुम्हारे जैसे असंख्य बच्चों की सुरक्षा में तैनात हैं। जब वे शहीद होते हैं, तो कोई यह क्यों नहीं पूछता कि वह हिंदू है या मुसलमान? उस दिन जब मैं अपने दोस्त के घर गया था, तो यह देखकर खुशी हुई कि वहां जो लोग इकट्ठा हुए थे, वे धर्म या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि देश के नागरिक होने के नाते इकट्ठा हुए थे।
मेरे दोस्त को अपने बेटे पर गर्व था। एक सैनिक यह सोचकर नहीं लड़ता कि वह किसी हिंदू या मुसलमान के लिए लड़ रहा है। पर हम अक्सर इसी तरह सोचते हैं। आतिफ बोला, तो क्या हम भूल जाएं कि हमारा धर्म क्या है? दादा जी बोले, सोचो, अगर यही सवाल सरहद पर खड़े सारे फौजी पूछने लगें? या फिर कोई डॉक्टर मरीज से पूछने लगे तो? कोई नेता किसी फौजी या डॉक्टर को धर्म के रास्ते पर चलने को क्यों नहीं कहता, सोचा है कभी?