वैसे तो हिंदू धर्म के सभी त्योहार अपना अपना विशेष महत्व रखते हैं, लेकिन मकर सक्रांति का धर्म, दर्शन तथा खगोलीय दृष्टि से विशेष महत्व है। इस महत्व का कारण यह है कि वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों में हर महीने को दो भागो में बांटा है जो चन्द्रमा की गति पर निर्भर है- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इस तरह वर्ष को भी दो भागो में बांट रखा है जो सूर्य की गति पर निर्भर है जो उत्तरायण और दक्षिणायन कहलाता है। मकर सक्रांति के दिन से सूर्य उत्तर की ओर आने लगता है।
ज्योतिषशास्त्र में मकर संक्रांति को सूर्य का धनु से मकर राशि में आगमन के रूप में महत्व दिया गया है। धनु राशि में सूर्य का आगमन मलमास के तौर पर जाना जाता है। मकर राशि शनि की राशि है जो सूर्य का पुत्र है। मकर राशि में सूर्य के अगामन के समय को मकर सक्रांति कहा गया है। इस राशि में सूर्य के आने से मलमास समाप्त हो जाता है। यह एकमात्र पर्व है जिसे समूचे भारत में मनाया जाता है, चाहे इसका नाम प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग हो और इसे मनाने के तरीके भी भिन्न हों, किंतु यह बहुत ही महत्व का पर्व है। मकर सक्रांति के दिन ही गंगा ने सगर के पुत्रों का उद्धार किया था और गंगा सागर में मिली थी।