फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती आज, जानिए भगवान महावीर के उपदेश जो आज भी हैं प्रासंगिक

Tue, 31 Mar 2026 07:14 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mahavir Jayanti 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि पर भगवान महावीर की जयंती मनाई जाती है। महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार होता है। जैन सम्प्रदाय के लोग इस दिन भक्ति, अहिंसा और उनके बताए गए रास्तों का अनुसरण करते हैं। 
विज्ञापन
Mahavir Jayanti 2026 - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Mahavir Jayanti 2026: आज महावीर जयंती है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भगवान महावीर स्वामी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उनका जीवन और उपदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय जीवन के प्रत्येक पहलू को संतुलित और सार्थक बनाने का संदेश देते हैं। आज के समय में जब व्यक्ति भौतिकता, प्रतिस्पर्धा,भागदौड़ और मानसिक तनाव के जाल में उलझा हुआ है, तब महावीर स्वामी के सिद्धांत एक सशक्त मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं।
विज्ञापन


अहिंसा का व्यापक स्वरूप: विचार, वाणी और कर्म की शुद्धता
महावीर स्वामी ने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताया। यह अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न देने का संदेश देती है। आज के समय में बढ़ती असहिष्णुता, क्रोध और वैमनस्य के बीच यह सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में करुणा और सहानुभूति को अपनाए, तो पारिवारिक और सामाजिक जीवन में शांति और संतुलन स्थापित हो सकता है।

सत्य का अनुसरण: जीवन में विश्वास और आत्मबल का आधार
महावीर स्वामी के अनुसार सत्य केवल बोलने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना आवश्यक है। वर्तमान युग में जहां दिखावा और असत्य का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, वहां सत्य का पालन व्यक्ति को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति समाज में विश्वास का केंद्र बनता है और उसका जीवन अधिक स्पष्ट और संतुलित रहता है।

Mahavir Jayanti 2026 Date: महावीर जयंती कब है? जानिए क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व

अपरिग्रह की भावना: संतोष और संतुलन का मार्ग
विज्ञापन

अपरिग्रह का अर्थ है आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना। आज के उपभोक्तावादी युग में व्यक्ति अधिक पाने की दौड़ में संतोष को खोता जा रहा है। महावीर स्वामी का यह सिद्धांत सिखाता है कि सीमित संसाधनों में संतुष्ट रहना ही सच्ची समृद्धि है। यह न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायक होता है।

संयम और ब्रह्मचर्य: आत्मनियंत्रण से जीवन में स्थिरता
संयम का तात्पर्य केवल इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना है। महावीर स्वामी ने ब्रह्मचर्य और अनुशासन को आत्मविकास का आधार माना। आज के समय में जब व्यक्ति त्वरित सुख के पीछे भागता है, तब संयम उसे धैर्य और विवेक के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

अनेकांतवाद का सिद्धांत: सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति
महावीर स्वामी का अनेकांतवाद यह सिखाता है कि सत्य एकांगी नहीं होता, बल्कि उसे विभिन्न दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है। यह सिद्धांत समाज में सहिष्णुता और संवाद की भावना को बढ़ावा देता है। वर्तमान समय में जब मतभेद अक्सर विवाद का कारण बनते हैं, तब अनेकांतवाद परस्पर समझ और सामंजस्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें