जेम्स को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। पिता जी ने उसे बचपन में ही क्रिकेट की कोचिंग में डाल दिया था और उनका प्रयास था कि जेम्स को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण मिले। जेम्स की मां उसे बहुत चाहती थी। वह ख्याल रखती थी कि जेम्स को अच्छा भोजन मिले, ताकि उसे भरपूर पोषण मिलता रहे और उसके खेल में कोई बाधा न आए। खेलते-खेलते जेम्स काफी अच्छा खिलाड़ी बन गया था। वह सुबह कॉलेज चला जाता था, फिर वहीं से स्टेडियम और फिर रात को दोस्तों के साथ मुलाकात कर देर से घर लौटता था।
वह जब सुबह नहा धोकर तैयार होता था, तभी से मां तमाम पसंदीदा व्यंजन बनाकर उसके पीछे लग जाती थी। जब तक जेम्स खा न ले, वह पीछे-पीछे घूमती रहती थी। वह तब तक नहीं सोती थी, जब तक जेम्स लौटकर घर न आए और उसका चेहरा न देख लें। जेम्स जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था, उसे अपनी मां की इतनी चिंता और प्यार अटपटा लगने लगा था। वह अपनी मां से भागने लगा था।
एक दिन जब वह नहा-धोकर तैयार हुआ, तो मां हलवा लेकर सामने खड़ी थी। लेकिन जेम्स का सुबह-सुबह हलवा खाने का मन नहीं था। वह बिना हलवा खाए निकल गया। धीरे-धीरे यह रोज की बात हो गई। जेम्स की अपनी मां से बात हुए काफी दिन गुजर गए। एक दिन जब वह मैच खेल रहा था, तो उसके कोच ने जेम्स को तुरंत घर जाने को कहा। जेम्स को एकाएक घर जाने की बात अटपटी लगी। वह जब पहुंचा, तो देखा कि घर के आगे काफी भीड़ है।
अंदर जाकर पता चला कि उसकी मां का देहांत हो गया है। वह स्तब्ध रह गया। उसको वे दिन याद आने लगे, जब मां उसे बुलाती थी और वह उसे पलट कर भी नहीं देखता था। हिम्मत जुटाकर अपनी मां के पास पहुंचने पर उसे एहसास हुआ कि उसकी मां कितनी सुंदर थी। शायद पहली बार उसने अपनी मां को गौर से देखा था। उसे एहसास हुआ कि उसके जीवन से एक बहुत बड़ी चीज चली गई है।