मोहित और रोहित सगे भाई थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से उनमें काफी अनबन चल रही थी। दोनों एक दूसरे से बात करना तो दूर, शक्ल तक नहीं देखना चाहते थे। एक बार ऐसा हुआ कि मोहित को व्यवसाय में काफी फायदा हुआ, जबकि रोहित को कुछ नुकसान उठाना पड़ा। मोहित ने खुशी मनाने के लिए एक बड़ी पार्टी रखी, जिसमें सभी दोस्त और रिश्तेदारों को बुलाया। जाहिर था कि उस पार्टी में रोहित नहीं आया। उस दिन मोहित के पिता गांव से पार्टी में शामिल होने के लिए आए थे। मोहित को यह जानकर बहुत खुशी हुई कि पिता जी भी उसकी खुशी में शरीक हुए।
आमना-सामना होने पर पिता जी और मोहित के बीच रोहित के बारे में बातचीन होना तो स्वाभाविक बात थी। पिता जी खाना खाने जा ही रहे थे कि मोहित उनके पास बात करने के लिए आया। पिता जी ने बड़े अच्छे मिजाज में मोहित से पूछा, बेटा, रोहित से जो भी हुआ, वह एक गलती थी। उसे माफ कर दो और दोनों साथ में आगे बढ़ो। मोहित ने देखा कि पिता जी प्लेट में चावल रख रहे थे। मोहित ने बगल से दाल उठाई और पिता जी की प्लेट में पड़े चावल के ऊपर डाल दी।
मोहित बोला, पिता जी, क्या आप इस चावल में से दाल अलग कर सकते हैं। पिता जी मोहित की तरफ देखने लगे। मोहित बोला, जो एक बार हो गया, उसे वापस नहीं किया जा सकता। उसे लगा, शायद अब पिता कुछ नहीं बोलेंगे। लेकिन तभी पिता बोले, बेटा, मजा तो तब है, जब दाल-चावल दोनों का साथ आनंद लिया जाए। और जहां तक बात है गलती की, तो जो गलती उसने की, वहीं तो तुम भी कर रहे हो उससे अलग होकर। मोहित पिता जी से कुछ नहीं बोला और चुपचाप वहां से चला गया। पिता जी ने देखा, थोड़ी देर में मोहित रोहित को पार्टी में लेकर आ रहा था। रोहित पिता जी से आकर बोला, मोहित ने मुझे माफ कर दिया पिता जी। मेरे लिए आज बहुत खुशी का दिन है। अब हम साथ में बिजनेस कर सकते हैं।