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जीना है तो मरने की कला सीख लें

Wed, 11 Sep 2013 12:20 PM IST
टीम डिजिटल
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जीने की चाहत हम सभी में है, और जीना भी ऐसे वैसे नहीं बल्कि हम सभी सुख-शांति पूर्वक जीना चाहते हैं। लेकिन जीने की इसी चाहत में इंसान हर दिन मरता रहता है। कभी आने वाले कल की चिंता तो कभी अधिक पैसा कमाने की लालच में इंसान घुलता रहता है।
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शरीर के अंदर बैठी आत्मा मनुष्य की इस स्थिति से दिन ब दिन कमज़ोर होती रहती है और सिकुरती जाती है। समय से पहले आकर मृत्यु व्यक्ति के प्राण हर लेती है। मनुष्य खुद ही अपनी आकांक्षाओं और मोह माया के पिंजरे में फंसकर दुःख प्राप्त करता रहता है।

जिस दिन हम आकांक्षाओं और मोह के पिंजरे से निकलकर मुक्त भाव से जीना शुरू कर देंगे उस दिन से मौत हमसे दूर भागने लगेगी और हम उसी तरह जीने लगेंगे जैसे एक आजाद पछी अपने पंख फैलाकर मुक्त भाव से आसामन में उड़ती है।
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अन्यथा हम सभी का हाल पिंजरे में बंद तोते की तरह होगा जो मुक्ति की कामना में छटपटाता रहता है। अगर सच्चे गुरू मिल गए तो आजाद हो जाएंगे अन्यथा बंधन में और उलझते जाएंगे।

संदर्भ कथा
इस संदर्भ में एक कथा प्रस्तुत है। एक तोता पिंजरे में बंद था। हर दिन पिंजरे से निकलने के सपने देखता था लेकिन बाहर की दुनिया में बैठे-बैठे अच्छे भोजन प्राप्त नहीं होंगे इसलिए सपने से समझौता कर लेता था।

एक बार तोते का मालिक कहीं जा रहा था। उसी मार्ग में तोते के गुरू का रहता था। तोते ने मालिक से कहा कि आप मेरे गुरू से मिलकर आना। मालिक ने तोते की बात मान ली।

रास्ते में तोते का गुरू मिला। तोते के गुरू ने अपने शिष्य का हाल पूछा तो तोते के मालिक ने बताया कि वह पिंजरे में बंद है और मेरे द्वारा दिए टुकड़ों पर जीता है। यह बात सुनकर गुरू छटपटाया और मर गया। जब तोते का मालिक घर लौटकर आया तब तोते ने पूछा कि मेरे गुरू ने मेरे लिए कोई संदेश भेजा है।

मालिक ने कहा कि मैंने जैसे ही तुम्हारा हाल बताया वह छटपटाया और मर गया। यह बात सुनते ही तोता भी छटपटाने लगा और मर गया। तोते को मरा हुआ मानकर मालिक ने उसे पिंजरे से बाहर निकाल दिया और तोता तुरंत उड़ गया।

मालिक ने पूछा तुम तो जिंदा हो फिर मरने का बहाना क्यों किया। तोते ने जवाब दिया यही मेरे गुरू का संदेश था कि जीना है तो मरना सीख लो अन्यथा हर दिन गुलामी की रोटी खाकर मरते रहोगे।
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