केतन अपने परिवार के साथ एक तीर्थ स्थान पर दर्शन करने के लिए गया था। वह जैसे ही दर्शन कर के बाहर निकला, उसने देखा एक छोटी-सी लड़की उसका कुर्ता खींच रही है। उसने सोचा यह लड़की जरूर भीख मांग रही होगी, और उसने उसे दुत्कार कर भगा दिया। केतन की पत्नी ने उस लड़की को वापस बुलाया और उससे पूछा, क्या चाहिए तुम्हें? वह लड़की बोली, आंटी मैं पांचवीं में पढ़ती हूं और कल मेरी फीस जमा करने का आखिरी दिन है। मेरे पास मेरी कुछ कविताएं हैं, जिन्हें मैं बेचकर पैसे इकट्ठा कर रही हूं।
केतन की पत्नी ने लड़की से उसकी कविताएं मांगीं। लड़की ने कुछ कागज के पन्ने अपनी कॉपी में से निकाल कर उसे दे दिए। केतन की पत्नी ने देखा कि कविताएं सचमुच हाथ से लिखी हुई थीं और बहुत सुंदर कविताएं थीं। उसने लड़की से पूछा, यह कविताएं किसने लिखीं। लड़की बोली यह मेरे पिता जी की कविताएं हैं। केतन ने पूछा, कहां हैं तुम्हारे पिता जी। बुलाओ जरा उन्हें यहां। लड़की ने सिर नीचे कर के कहा, अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। केतन और उसकी पत्नी हैरान होकर उस लड़की की तरफ देखने लगे।
केतन की पत्नी बोली, क्या तुम हमें अपने घर ले चलोगी। लड़की उन दोनों को अपने घर ले गई। वह लड़की एक अभी बन रही इमारत में रहती थी। जब वह वहां पहुंचे, तो देखा उसकी मां अपने छोटे बेटे को दूध पिला रही थी। केतन ने हिचकती आवाज में पूछा, क्या यह कविताएं आपके पति की हैं। लड़की की मां बोली, जी हां, वह एक कवि थे। लेकिन पिछले साल बीमारी ने उनकी जान ले ली। केतन को उस वक्त बहुत अफसोस हुआ कि उसने उस छोटी-सी बच्ची के साथ इतना बुरा व्यवहार किया। उसने तुरंत उनको कुछ पैसे दिए और आगे चलकर उन कविताओं की एक किताब भी छपवाई। उस किताब से जितना पैसा आया उससे उस लड़की के परिवार के लिए एक घर का इंतजाम किया और उसकी मां को नौकरी भी दिलवाई।