सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव जी का जन्म दिवस हर साल कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। समाज को नई दिशा और प्रकाश देने के कारण सिख संप्रदाय के लोग इनके जन्मदिवस को प्रकाश पर्व के रूप में मनाते हैं। नानक देव समाज को एक उच्च आदर्श की ओर ले जाना चाहते थे।
यह धर्म को व्यवहारिकता पर केन्द्रित करने की इच्छा रखते थे। अपने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए नानक देव ने लोगों को तीन बातों की शिक्षा दी भगवान का स्मरण करो। भगवान की भक्ति का मतलब कर्म से हटना नहीं है इसलिए भक्ति के साथ काम पर भी ध्यान दो।
तीसरी बात इन्होंने सिखायी सिर्फ अपने लिए ही मत सोचो, जरूरतमंदों की मदद करो। नानक देव धर्म में दिखावा पसंद नहीं करते थे। यही कारण है कि अपने उपनयन संस्कार के समय इन्होंने जनेऊ धारण करने से मना कर दिया था।
इनका मानना था कि ईश्वर सर्वत्र सर्वव्यापी है इसलिए ऐसा सोचकर कोई काम नहीं करना चाहिए कि यहां पर ईश्वर नहीं है। इस बात को इन्होंने अपनी अरब यात्रा के दौरान स्पष्ट किया।
इस संदर्भ में कथा है कि अरब यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने नानक देव से कहा कि काबे की तरफ पैर करके न सोएं। इसके उत्तर में नानक देव ने कहा कि 'ऐसी दिशा या जगह बता दो जहां खुदा न हो'