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International Yoga Day 2021: 21 जून को इसलिए मनाया जाता विश्व योग दिवस, जानें कारण

Mon, 21 Jun 2021 06:33 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

21 जून का दिन उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति भी कह सकते हैं। भारतीय संस्कृति के दृष्टिकोण से, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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साल 2015 से प्रति वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। नित्य योग-व्यायाम करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ्य रहते हैं। योग-व्यायम से हमें एक आंतरिक ऊर्जा भी मिलती है। जिससे हमारे अंदर एक गजब का साहस पैदा होता है, हम संयम रखना सीखते हैं, एकाग्र होना सीखते हैं। आवेश, क्रोध आदि विकारों पर नियंत्रण रखना सीखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन का विशेष महत्व है। 

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विश्व योग दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
ज्योतिष शास्त्र में योग दिवस का महत्व
21 जून का दिन उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति भी कह सकते हैं। भारतीय संस्कृति के दृष्टिकोण से, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, सूर्य के दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में बहुत लाभकारी माना जाता है। इसी कारण 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।  

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
इस दिन सूर्यदेव होते हैं अधिक प्रभावी
21 जून के दिन सूर्य जल्दी उदय होता है और देरी से ढलता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य का तेज सबसे प्रभावी रहता है, और प्रकृति की सकारात्मक उर्जा सक्रिय रहती है। कहा जाता है कि योग का पहला प्रसार शिव द्वारा उनके सात शिष्यों के बीच हुआ था। इन सप्त ऋषियों को ग्रीष्म संक्राति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के दिन योग की दीक्षा दी गई थी, जिसे शिव के अवतरण के तौर पर भी मनाते हैं। इसे दक्षिणायन के नाम से भी जाना जाता है।
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विश्व योग दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
योग क्या है?
योग एक साधना है, जिसके माध्यम से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहता है। योग तन और मन से जुड़े तमाम तरह के रोग और विकारों को दूर कर मनुष्य का जीवन आसान कर देता है। यह मानव की हर तरह की शुद्धि का आसान उपकरण है। योग, भारतीय ज्ञान की पांच हजार वर्ष पुरानी विरासत है, जिसके प्रणेता महर्षि पतंजलि को माना जाता है। योग साधना में जीवन शैली का पूर्ण सार समाहित किया गया है।
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