किशन भाई बोले, बंद कमरे में कैद रहना कोई नहीं चाहेगा। लेकिन हम अनजाने में अपने बच्चों के साथ अक्सर यही करते हैं। उन्हें अपनी अपेक्षाओं के बंधन में बांध देते हैं। और अगर कहीं उन्होंने हमारी अपेक्षाएं पूरी नहीं कीं, तो हमें लगता है, जैसे वह हमारा अनादर कर रहा है।
रीना जी बोलीं, पर हम तो बच्चों का भला ही चाहते हैं। किशन भाई बोले, बिल्कुल। लेकिन हमें यह भी अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि उनका भला चाहते हुए उन्हें उनके अपने अनुभवों से वंचित न रखें। उनके हिस्से के गलत-सही अनुभव उनको करने दें, क्योंकि वे अनुभव ही उनके लिए असल सीख होंगे। और अगर हम उन्हें ऐसा करने देंगे, तो हमारे अंदर भी कोई ऐसा भाव रह नहीं जाएगा कि वह हमारी बात सुन नहीं रहे, क्योंकि हमें उनसे कोई अपेक्षा रह ही नहीं जाएगी।