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सीख: अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई चुनौती सपने पूरे करने से नहीं रोक सकती

Sat, 14 Jul 2018 02:43 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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मनीष की कहानी, जो एक आतंकी हमले में अपंग होने के बाद भी जिंदगी से नहीं हारा।

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रौशन और उसके इक्कीस दोस्त, जो कुछ  देर पहले ही स्टेशन पर पहली बार उससे मिले थे, ट्रेन से श्रीनगर जा रहे थे। साथ बैठे एक सज्जन ने पूछा, क्या आप एक ही परिवार से हैं?
रौशन बोला, जी नहीं। हम सब दुनिया के अलग-अलग कोने से आए हैं। कुछ फौजी हैं, कुछ इंजीनियर, तो कुछ आईआईटी से। हम सब मनीष के दोस्त हैं। सज्जन ने पूछा, मनीष? रौशन बोला, जी हां। मनीष श्रीनगर में एक आर्मी कैंप में पोस्टेड था और अगले महीने शादी करने एक महीने की छुट्टी पर जाने वाला था।
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पर अचानक एक आतंकी हमले ने उसकी जिंदगी बदल दी। उसे पता चला कि एक स्कूल बस के नीचे बम है। उसने बस से सारे बच्चों को तो निकाल लिया, पर जब वह तसल्ली के लिए दोबारा बस के अंदर गया, तभी बम फट गया। मनीष के दोनों पैर और एक हाथ कटकर अलग हो गए। ऑपरेशन और सर्जरी से मनीष की हालत स्थिर तो हुई, पर उसकी जिंदगी जैसे खत्म हो गई। लेकिन मनीष एक फौजी था। उसने तय कर लिया कि वह व्हीलचेयर के सहारे नहीं जिएगा। जिस लड़की से मनीष की शादी तय हुई थी, उसने भी उसका साथ दिया।
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वह लड़की मनीष से शादी के लिए तैयार थी, पर मनीष ने ठान लिया था कि दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने के बाद ही वह शादी करेगा। उसने आईटी में ग्रेजुएशन किया और फिर आईआईटी से परास्नातक किया। आज वह आईआईटी में बतौर सीनियर प्रोफेसर काम करता है और हजारों युवाओं को जीने की राह सिखाता है। उसने यहां मौजूद हममें से हर किसी को कभी न कभी गहराई से छुआ है। हम सारे लोग आज मनीष की शादी में श्रीनगर जा रहे हैं। सज्जन ने पूछा, क्या मनीष श्रीनगर में रहता है? रौशन बोला, जी नहीं। उसने तय किया है कि वह अपनी नई जिंदगी वहीं से शुरू करेगा, जहां उसने छोड़ी थी।

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