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अगर हम अपने विवेक की सुनें, तो कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएंगे

Wed, 14 Mar 2018 09:46 AM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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विहान की कहानी, जिसे उसकी टीचर ने बताया कि विवेक के अनुसार चलने वाला गलत रास्ते पर नहीं जा सकता।

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विहान और उसके दोस्त एक दिन स्कूल की एक पुरानी टीचर से मिलने गए। टीचर उन्हें देखकर बहुत खुश हुईं। उन्हें अपने पूर्व छात्रों पर गर्व हुआ कि अब वे शहर के बड़े-बड़े कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। टीचर ने हमेशा विहान और उसके दोस्तों को स्नेह दिया था। वह उनसे हर तरह की बातें करती थीं। विहान बोला, टीचर, हम आपसे एक सवाल पूछना चाहते हैं।

अब जब हम कॉलेज में हैं, तो हमें हर तरह के बच्चे मिलते हैं। कोई सिगरेट पीता है, तो कोई क्लास बंक कर डिस्को जाता है। कोई दिन-रात शराब के नशे में पड़ा रहता है, तो कोई सारा समय सिर्फ गिटार ही बजाता है। समझ में नहीं आता कि हमें उन लोगों का साथ देना चाहिए या नहीं। टीचर मुस्कराते हुए कहने लगीं, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि तुम्हें सही-गलत का एहसास है। तुम्हें पता है कि तुम्हें अपनी दिशा निर्धारित करनी है और उसी दिशा में आगे बढ़ना है।
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कितने लड़के तो ऐसे हैं, जिन्हें यह पता ही नहीं होता कि उन्हें जाना कहां है। विहान बोला, लेकिन मुझे भी कहां पता है कि मुझे कहां जाना है। टीचर बोलीं, तुम्हे पता सब है, बस उसका एहसास नहीं। अच्छा, तुम मुझे एक बात बताओ, अगर तुम्हें कोई आकर यह कहे कि जहर बहुत अच्छी चीज है और इसे खाने से बहुत आनंद आता है, तो क्या तुम उसे मान लोगे? विहान बोला, बिल्कुल नहीं।
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टीचर ने पूछा, पर अगर तुम्हें भूख लगी हो और खाने को और कुछ भी न हो, तब भी जहर नहीं खाओगे? विहान बोला, नहीं, क्योंकि वह जहर है। टीचर ने फिर पूछा, अगर कोई तुम्हें सामने लगे फिल्टर का पानी निकाल कर दे और बोले, इसे पीने से प्यास बुझ जाएगी, तो क्या तुम उसे पी लोगे? विहान बोला, हां, क्यों नहीं? टीचर बोलीं, तुम्हें पता है कि क्या करना है। हमारा विवेक हमें यह बता देता है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत। अब उसको मान लेना है या उसे नजर अंदाज कर गलत रास्ते पर आगे बढ़ना है, यह तुम पर निर्भर करता है।

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