आध्यात्मिक जीवन जीने की कोशिश कर रहे व्यक्ति के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए यह जानना जरूरी है कि हम कृत्रिम जीवन शैली से उत्पन्न अस्वास्थ्य से खुद को कैसे मुक्त करें। खुद को मुक्त करने पर ही हम पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त कर सकेंगे। हम भूल जाते हैं कि आत्मिक चेतना में ही रोग-मुक्ति और कष्ट-निवारण के साधन छिपे हैं। जब हम व्यक्तित्व के सम्पूर्ण स्वरूप को समझ पाते हैं, तब यह ज्ञान जागृत होता है कि मानव केवल एक भौतिक प्राणी मात्र नहीं है। उसके भीतर ऐसी अनेक विषमताएं हैं जिनकी शक्ति को वह परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए प्रयोग में लाता है। योग विज्ञान के अनुसार मनुष्य का स्नायु तंत्र उसके अस्तित्व और क्षमता, दोनों को व्यक्त करने का साधन है। यह तंत्र अवरोध भी बन सकता है और द्वार भी। यह हम पर निर्भर है कि हम इसका प्रयोग कैसे करते हैं? ध्यान और संतुलित जीवन शैली के साथ अभ्यास और साधना से हम अपनी इंद्रियों, स्नायुओं, भावनाओं, और संपूर्ण चेतना को निर्मल बना सकते हैं।