हमारी कोशिश होती है कि हम अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकें, लेकिन इच्छाएं कभी खत्म ही नहीं होतीं। जैसे ही एक इच्छा पूरी होती है, दूसरी जाग जाती है। जीवन ऐसे ही गुजरता चला जाता है। जबकि, बाहरी संसार की खुशी महज एक क्षणिक भ्रम ही है। इस संसार की हरेक चीज नाशवान है। एक न एक दिन हम स्वयं भी मृत्यु का ग्रास बन जाएंगे और अपनी सारी प्यारी वस्तुओं को इसी संसार में छोड़ जाएंगे। अब सवाल यह है कि सही प्रकार की इच्छा के लिए क्या जरूरी है? पहले तो हमें एक लक्ष्य चुनना चाहिए। और सही लक्ष्य है प्रभु को पाना, अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा से करवाना।
हम अपने जीवन की अमूल्य सांसें सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति में ही बर्बाद कर देते हैं। अंत में हमें महसूस होता है कि उनमें से किसी भी चीज ने हमें वह स्थाई खुशी नहीं दी, जो हम वास्तव में चाहते थे। प्राचीनकाल से ही संसार में आने वाले महापुरुष, जागृत व्यक्ति, संत, दार्शनिक आदि बताते हैं कि सच्ची खुशी हमें अवश्य मिल सकती है। इसके लिए हमें उसे केवल अपने भीतर ही खोजना होगा। खुशी का केवल एक ही स्रोत स्थाई है, वह है परमात्मा। यदि हम अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप के प्रति चेतन हो जाएंगे, तो हमें इतना अधिक प्रेम और खुशी मिलेगी, जो हमें किसी भी सांसारिक इच्छा की पूर्ति से प्राप्त नहीं हो सकती।