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चावल के कुछ दानें और थोड़ा मंत्र जप काफी है भगवान के करीब पहुंचने के लिए

Sun, 30 Aug 2015 10:22 AM IST
सदगुरु बोधिनाथ वेलनस्वामी
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शुरु में दस मिनट का अभ्यास काफी है। इस अभ्यास में चार गतिविधियां शामिल हैं। दिन के समय थोड़ा सा वक्त और अभ्यास के लिए नियमित कोशिश की जा सके तो अभ्यासियों को तैयार किया जा सकता है। कार्यक्रम अपनी दिनचर्या के हिसाब से बनाएं। इस अभ्यास को पंद्रह वर्ष की उम्र के आसपास शुरू किया जा सकता है। बाद में इसे दस मिनट से आधा तक बढ़ा सकते हैं।
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आध्यात्मिक कसरत में चार गतिविधियां शामिल हैं:
पूजा, आत्मनिरीक्षण, कथन  एवं अध्ययन। पूजा में अपने इष्ट देवता के मंत्र का जप या देवता के नौ या अधिक नामों का जाप करना। मूर्ति या तस्वीर को चावल के दानें अर्पित करना। श्रद्धा और कृतज्ञता की इस दूसरे चरण में शामिल है अपनी आंखे बंद करके ओम का नौ बार जाप करना।

मंत्र का उच्चारण ठीक प्रकार से किया जाना चाहिए। अपने आपको संकेत या निर्देश भी देना इस चरण में शामिल हैं। यह वे वाक्य हैं जिन्हें दोहराया या अपने आप से पूछा जाता है। इन सवालों या वाक्यों का अवचेतन मन पर प्रभाव पड़ता हैं।
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अध्ययन भाग में शामिल है पवित्र आध्यात्मिक ग्रंथों का पढ़ना जो आपको नया ज्ञान एवं अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। आप ऐसा ग्रंथ चुनें जो आपको स्पष्ट एवं प्रेरणादायक लगें। उन पुस्तकों को अनदेखा करें जिनके लिए थका देने जैसी मेहनत करना पड़े। आप पांच मिनट इसके लिए रखें।।

इन चारों अभ्यासों में पूजा वाले भाग का फायदा यह है कि यह भक्ति को बढ़ाता है। ओम के जप का आत्मविश्लेषी अभ्यास मन पर एक शांतिपूर्ण प्रभाव डालता है और हमारी ऊर्जा को उच्च श्रेणी के चक्रों की और  ले जाता है। यह स्वाभाविक और पहला कदम होगा। स्वसंकेत को प्रति दिन दोहराना आत्मविश्वासी बनने में सहायक होता है। अध्ययन जानकारी और विश्वास बढ़ाते हैं।
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