हर इंसान चाहता है कि उसके जीवन में सुख-चैन बना रहे, कोई परेशानी न हो, लेकिन ऐसा होता नहीं। परेशानियां हमेशा पीछे लगी रहती हैं। काम में बाधा उत्पन्न होती है व सुख-शांति छिन जाती है। यह मनुष्य के वर्तमान या पिछले जन्म के कर्मों का ही फल होता है। जीवन में आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए दैनिक जीवन में कुछ कार्य करते रहना चाहिए, ऐसा करने से कर्मदोष से मुक्ति पायी जा सकती है।
शास्त्रों में अन्न को ब्रह्मा कहा गया है। अन्न दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। कभी भी कोई आपसे भोजन की याचना करे, तो उसे सामर्थ्यानुसार प्रेमपूर्वक भोजन कराना चाहिए। अगर भोजन न करा सकें, तो कोई खाने की वस्तु खरीद कर भी दे सकते हैं। गरीबों को समय-समय पर भोजन कराने, अन्न दान करने से पुण्य अर्जित होता है और दुर्भाग्य दूर होता है। सर्दियों के मौसम में गरीबों को गर्म वस्त्र दान करना भी पुण्यकारी होता है। इससे गरीब व असहाय लोगों की दुआएं मिलती हैं और परमात्मा भी खुश होते हैं।
शास्त्रों में बीमार दुखियों की सेवा करना, भगवान की सेवा करने के बराबर माना गया है। यदि आपके आसपास कोई गरीब बीमार व्यक्ति हो, तो आप उसका इलाज करवाकर या दवाइयों आदि के लिए धन देकर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। ऐसा करने से बिगड़े काम बनते हैं, जीवन में खुशियां आती हैं। आपके घर या प्रतिष्ठान में कोई कर्मचारी या मजदूर काम कर रहा हो, तो उसको मेहनताना देने में आनाकानी न करें। उसकी मेहनत के पैसों के अलावा, उसे इनाम के तौर पर अलग से पैसे देने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यदि आप मजदूर या कर्मचारी का पैसा रोकेंगे, तो इससे आपका दुर्भाग्य प्रबल होगा और काम भी बिगड़ते जाएंगे।
कभी किसी अपाहिज, मंदबुद्धि व्यक्ति का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, न ही उन्हें अपमानित करना चाहिए। इससे बुरे कर्म अर्जित होते हैं। अगर संभव हो तो उनकी हर संभव मदद करनी चाहिए। धार्मिक मान्यतानुसार, किन्नर बिरादरी का भी कभी मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। उनका मजाक उड़ाने या उन्हें अपशब्द कहने से जीवन परेशानियों से घिर जाता है।
प्राचीन मान्यतानुसार, बड़े बुर्जुगों का सम्मान करना विशेष फलदायी होता है। बुर्जुगों के चरण छूना पुण्य का कार्य माना गया है। चरण स्पर्श करने से जीवन सफलता से भर जाता है। प्रतिदिन अपने माता-पिता व घर के बड़े-बुर्जुगों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है।
रात में सोने से पहले भगवान से उस दिन जाने-अनजाने आपसे हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए और आगे कोई गलतियां न हों, इसके लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए। प्रातः काल स्नान करके गाय को रोटी खिलाने से दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है। घर के दरवाजे आये किसी भी भिखारी या साधु को कभी खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए। उसे कुछ न कुछ उन्हें अवश्य देना चाहिए। जीवन में परेशानियां बढ़ जाएं, तो कम से कम एक पीपल का पेड़ लगाकर नियमित रूप से उसे जल देना चाहिए। इससे कर्मदोष दूर होते है।
प्रातः काल उठने के बाद एक दो मुट्ठी अनाज पक्षियों के लिए डालना चाहिए व उनके लिए पानी रखना चाहिए। चींटियों के लिए आटा या शक्कर डालना भी कर्मदोष दूर करता है। भगवान का पूजन प्रतिदिन करना चाहिए, इससे भगवान की कृपा से दोष दूर होते हैं।