पूर्ण स्वस्थ अवस्था के लिये, एक व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत, स्थिर और भावनात्मकता के रुप से कोमल रहना होगा यह कहना है श्रीश्री रविशंकर का। हलांकि आजकल की तेज रफ्तार वाले जीवन में यह इतना सरल नही है। अपने तनाव के स्तर को संभालने के लिये दो माध्यम है। हम अपने मानसिक और शारीरिक कार्य भार में कमी लाएं। या फिर अपनी ऊर्जा के स्तर को बढ़ाएं। इसके लिए आप आप आसान से उपाय आजमा सकते हैं।
करें खुद की सर्विसिंग
हमें अपने अस्तित्व सभी स्तर को जानना होगा- शरीर, श्वास, मन, बुद्धि, स्मृति, अहं और स्व। इससे हमें वर्तमान क्षण में रहने में सहायता मिलती है और जीवन के सुर से सुर मिल जाता है।
हर वर्ष एक सप्ताह का समय चुनो, जिस प्रकार एक कार सर्विस के लिए जाती है। इस सप्ताह में अपने अंतर को प्रकृति के साथ लय बद्घ कर लें, सूर्योदय के साथ उठे, योगाभ्यास करें, सही भोजन करें और गीत संगीत के साथ कुछ समय गुजारें।
नियमित ध्यान करें
ध्यान से गहरा विश्राम मिलता है। जो गहरा विश्राम करता है, वह ज्यादा सक्रियता से काम कर पाता है। पूर्ण अध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिय तो ध्यान एक कुंजी है। ध्यान का अर्थ है-मन बिना क्रोध के, संकोच के और प्रतिक्रिया के हो और वर्तमान क्षण में हो।
भोजन में नहीं करें ऐसी गलतियां
भोजन से पहले रखें ध्यान
एक स्वस्थ शरीर और हमारी भावनाओं, विचारों और कर्मों के नियंत्रण के लिये हमें यह ध्यान रखना होगा कि हम क्या खा रहे हैं। ऐसा कहा जाता है ‘जैसा अन्न वैसा मन‘। जो कुछ भी हम भोजन करतें हैं उसका हमारे शरीर और मन पर पूरा प्रभाव पड़ता है। ताजा भोजन, फल और कुछ सब्जियों से हमारे प्राण ऊर्जा में वृद्घि होती है, जंक भोजन एवं डिब्बा बंद भोजन में कम प्राण ऊर्जा होती है। ताजा भोजन एक सर्वोत्तम पोषक भोजन होता है जो उत्साह, स्फूर्ति, जीवटता, शक्ति और दीर्घ आयु प्रदान करता है।
सांस का तरीका जानें
श्वास जीवन है। हमें न तो विद्यालय में और न ही घर
में श्वास के महत्व के बारे बताया गया है। यदि हमे हमारी श्वास की शक्ति के
बारे में समझ में आ जाए तो हमें हमारे विचार और अनुभव का ज्ञान हो जाएगा।
हम अपने क्रोध और नकारात्मकता को जीत सकते हैं।
मौन रहना सीखें
हर दिन हम अपना सारा समय सूचना एकत्रित करने में ही निकालते हैं और स्वयं के लिये कोई समय नही निकाल पाते। ऐसा करने पर हम स्वयं थका हुआ और उदास पाते है। कुछ देर का मौन रचनात्मकता को बढ़ाता है।
मौन से स्वयं में शक्ति का संचार होता है और स्वयं को गहराई और स्थिरता देता है। दिन में कुछ समय आंखे बंद करके स्वयं के दिल में बैठ कर संसार को एक गेंद की तरह किक मारो।