फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाली अमावस पर पांच पौधे लाएंगे जीवन में हरियाली

विज्ञापन
विज्ञापन
सावन की अमावस प्रकृति में आई बहार का उत्सव है। उत्सव इसलिए कि इस दिन स्वाभाविक उल्लास लोगों को आपस में करीब लाता है। और व्यक्ति अपने आपको प्रकृति के करीब पाता है। पर्व के कर्मकांड, देव पूजन और हास परिहास के साथ इस दिन कम से कम एक पौधा अवश्य रोपने का रिवाज है।
विज्ञापन


वास्तव में वृक्षारोपण इस दिन का प्रमुख आयोजन बनना चाहिए। कम से कम पांच तरह के वृक्ष ऐसे जरूर हैं जिनका आध्यात्मिक महत्व है।

इन पांच वृक्षों का बड़ा है महत्व

पीपल, वटवृक्ष, आम, नीम, शमी वृक्ष महत्वपूर्ण हैं। कुछ विद्वान पांच वृक्षों की गणना अलग तरह से करते हैं, लेकिन उसमें पीपल और वटवृक्ष दोनों निश्चित होते हैं। वजह उनका आध्यात्मिक गुण है। जैसे भगवद्गीता में पीपल को तो कृष्ण ने अपना ही स्वरूप बताया है।

और जब संसार महाप्रलय में डूब रहा होता है, तो भगवान बाल रूप में वटवृक्ष के पत्ते पर ही तैरते हुए चित्रित किए जाते हैं। ऋषियों ने गाया है कि जबसे धरती पर वृक्षों का अस्तित्व प्रकट हुआ तबसे आज तक उन्होंने अपने धर्म का निष्ठापूर्वक पालन किया। ईश्वर ने उन्हें जो काम सौंपा था उसे वे निभाते रहे हैं।

जलवायु एवं वातावरण के संतुलन को बनाए रखने का कार्य करते हुए भी वे जैसे हमेशा ईश्वर की प्रार्थना में लीन रहते हैं। इन पुण्यात्मा वृक्षों की दैनिक जीवन में भी उपयोगिता है। जैसे पीपल की छाल से लेकर पत्ते फल बीज कोपल दूध जटा आदि सभी अंगों का महत्व है। ये अंग आधि-व्याधियों के निदान और यज्ञ हवन पूजा पाठ आदि धार्मिक प्रयोजनों में काम आते हैं।

विज्ञापन

आयु बढ़ाने वाले वट वृक्ष

शास्त्रों में पीपल और वट वृक्ष को अमृततुल्य माना गया है। सर्वाधिक ऑक्सीजन छोड़ने वाला करने के कारण इसे प्राणवायु का भंडार कहा जाता है। सबसे अधिक ऑक्सीजन का सृजन और विषैली गैसों को आत्मसात करने की पीपल में अकूत क्षमता है। वहीं बरगद या वटवृक्ष में स्वास्थ्य आयु और शांति को बनाए रखने का अद्भुत गुण है।

परंपरा के अऩुसार चार वटवृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में उक्त चार वटों को पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है। प्रयाग में अक्षयवट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।

वैसे वृक्ष वनस्पति को जीवित व्यक्तियों की तरह ही महत्वपूर्ण माना गया है। इतना महत्वपूर्ण कि भाई भतीजे बहन माता पिता आदि संबंधों की तरह वृक्षों के भी एक पूरा त्यौहार ( हरियाली अमावस्या) समर्पित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें